ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq

ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 3 ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 4 ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 5 ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 6 ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 2 ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 1 ख़ूब रोका शिकायतों से…

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ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 3

ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 3 दरिया-ए-अश्क चश्म से जिस आन बह गया दरिया-ए-अश्क चश्म से जिस आन बह गया सुन लीजियो कि अर्श का ऐवान बह गया बल-बे-गुदाज़-ए-इश्क़ कि ख़ूँ हो के दिल के साथ सीने से तेरे तीर का पैकान बह गया ज़ाहिद शराब पीने से काफ़िर हुआ मैं क्यूँ क्या डेढ़ चुल्लू पानी में ईमान बह गया है मौज-ए-बहर-ए-इश्क़ वो तूफ़ाँ कि अल-हफ़ीज़ बेचारा मुश्त-ए-ख़ाक था इंसान बह गया…

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ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 4

ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 4 तेरे आफ़त-ज़दा जिन दश्तों में अड़ जाते हैं तेरे आफ़त-ज़दा जिन दश्तों में अड़ जाते हैं सब्र ओ ताक़त के वहाँ पाँव उखड़ जाते हैं इतने बिगड़े हैं वो मुझ से कि अगर नाम उन के ख़त भी लिखता हूँ तो सब हर्फ़ बिगड़ जाते हैं क्यूँ न लड़वाएँ उन्हें ग़ैर कि करते हैं यही हम-नशीं जिन के नसीबे कहीं लड़ जाते हैं न खींचो आशिक़-तिश्ना-जिगर…

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ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 5

ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 5 तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर चुपके ही बैठे रहे दम को मसीहा लेकर शर्ते-हिम्मत नहीं मुज़रिम हो गिरफ्तारे-अज़ाब तूने क्या छोड़ा अगर छोड़ेगा बदला लेकर मुझसा मुश्ताक़े-जमाल एक न पाओगे कहीं गर्चे ढूँढ़ोगे चिराग़े-रुखे-ज़ेबा लेकर तेरे क़दमों में ही रह जायेंगे, जायेंगे कहाँ दश्त में मेरे क़दम आबलाए-पा लेकर वाँ से याँ आये थे ऐ 'ज़ौक़' तो…

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ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 6

ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 6 हम हैं और शुग़्ल-ए-इश्क़-बाज़ी है हम हैं और शुग़्ल-ए-इश्क़-बाज़ी है क्या हक़ीक़ी है क्या मजाज़ी है दुख़्तर-ए-रज़ निकल के मीना से करती क्या क्या ज़बाँ-दराज़ी है ख़त को क्या देखते हो आइने में हुस्न की ये अदा-तराज़ी है हिन्दू-ए-चश्म ताक़-ए-अबरू में क्या बना आन कर नमाज़ी है नज़्र दें नफ़्स-कुश को दुनिया-दार वाह क्या तेरी बे-नियाज़ी है बुत-ए-तन्नाज़ हम से हो ना-साज़ कारसाज़ों की कारसाज़ी है…

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ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 2

ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 2   गुहर को जौहरी सर्राफ़ ज़र को देखते हैं गुहर को जौहरी सर्राफ़ ज़र को देखते हैं बशर के हैं जो मुबस्सिर बशर को देखते हैं न ख़ूब ओ ज़िश्त न ऐब-ओ-हुनर को देखते हैं ये चीज़ क्या है बशर हम बशर को देखते हैं वो देखें बज़्म में पहले किधर को देखते हैं मोहब्बत आज तिरे हम असर को देखते हैं वो अपनी बुर्रिश-ए-तेग़-ए-नज़र को…

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ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 1

ग़ज़लें -इब्राहिम ज़ौक-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq Part 1 जब चला वो मुझ को बिस्मिल ख़ूँ में ग़लताँ छोड़ कर जब चला वो मुझ को बिस्मिल ख़ूँ में ग़लताँ छोड़ कर क्या ही पछताता था मैं क़ातिल का दामाँ छोड़ कर मैं वो मजनूँ हूँ जो निकलूँ कुंज-ए-ज़िंदाँ छोड़ कर सेब-ए-जन्नत तक न खाऊँ संग-ए-तिफ़्लाँ छोड़ कर पीवे मेरा ही लहू मानी जो लब उस शोख़ के खींचे तो शंगर्फ़ से ख़ून-ए-शहीदाँ छोड़ कर मैं…

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ख़ूब रोका शिकायतों से मुझे-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq 

ख़ूब रोका शिकायतों से मुझे-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq ख़ूब रोका शिकायतों से मुझे तू ने मारा इनायतों से मुझे वाजिब-उल-क़त्ल उस ने ठहराया आयतों से रिवायतों से मुझे कहते क्या क्या हैं देख तो अग़्यार यार तेरी हिमायतों से मुझे क्या ग़ज़ब है कि दोस्त तू समझे दुश्मनों की रिआयतों से मुझे दम-ए-गिर्या कमी न कर ऐ चश्म शौक़ कम है किफ़ायतों से मुझे कमी-ए-गिर्या ने जला मारा हुआ नुक़साँ किफ़ायतों से मुझे ले…

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