कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 1 कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 2 कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 3 कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 4 यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Kavitayen दर्द भरी शायरी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Dard Bhari…

Continue Readingकविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 1

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 1 रेल गाड़ी चलती है पटरी पर रेल गाड़ी चलती है पटरी पर, जिंदगी भी चलनी चाहिए। उतरी अगर रेल पटरी से, तो अंजाम समझ जाइए। पटरी पर चलने के लिए, साथ सबका चाहिए। दुनिया बोले झूठ, आप सच का रास्ता अपनाइये। नाक़ाम होने पर, हताश मत होजाइये। कोशिश कर दुबारा, कामयाब होना चाहिए। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए, कुछ अलग करके दिखाइए। कुछ अलग करने…

Continue Readingकविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 1

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 2

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 2 पूरी जिंदगी गुजर जाती है पूरी जिंदगी गुजर जाती है, रिश्ते निभाने के लिए। किंतु गलतफहमियाँ काफ़ी होती है, रिश्ते तुड़वाने के लिए। कोशिशें लाख करनी पड़ती है, कामयाबी पाने के लिए। किंतु चंद गलतियाँ बहुत होती है, रास्ते पर आने के लिए। इसही तरह जीवन बीत जाता है, पैसा और नाम कमाने के लिए। ‘युवराज’ अंत में समय भी नहीं मिल पाता परिवार के साथ…

Continue Readingकविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 2

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 3

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 3 गंगा हर की जटा से बहती गंगा हर की जटा से बहती, गले मे सर्प की माला है। डमरू बाजे डम डम डम डम शिव तांडव करे निराला है। अर्ध-चंद्र का मुकुट है पहने मस्तक पर जलती ज्वाला है। बाबा भोला भला हमारा करुणा करने वाला है। पर्वतराज की पुत्री के संग बैठ संसार संभाला है। असाधारण आपदा को नियंत्रित करने वाला है। देवो का देव…

Continue Readingकविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 3

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 4

कविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal (instagram handle)Part 4  चोट लगेंगी तो लोग चोट लगेंगी तो लोग, नमक ही लगाएंगे। अंत में अपने ही, हमकों मरहम लगाएंगे। कितना भी उड़ लो, पंख कट ही जायेंगे। और ऐसी गति में, सिर्फ अपने अपनाएंगे। अपनो को छोड़ हम, अकेले पड़ जाएंगे। वह आगे बढ़ेंगे, हम पीछे रह जाएंगे। समय रहते सुधरे तो, कुछ हासिल कर पाएंगे। अन्यथा ‘युवराज’ हम, राह भटक जाएंगे।    जीवन में धैर्य…

Continue Readingकविता-युवराज हरितवाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yuvraj Haritwal Part 4