उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans  हाइकु-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans  उठो फूट के पात्र को फोड़ डालो-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans भेड़ियों के ढंग-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता…

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 हाइकु-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

हाइकु-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans #1. ताजमहल गुलमोहर पर ओस की बूँद । #2. दूज का चाँद विधवा के हाथ की ज्यों टूटी चूड़ी । #3. प्रकृति रानी भू पर लहराती चूनर धानी। #4. प्रीत की रीत उल्लास के सुरों में पीड़ा का गीत । #5. रात चाँदनी गगन से बरसे बेला के फूल । #6. वर्षा की बूँदें टूटकर बिखरे माला के मोती । #7. सान्ध्य…

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 उठो फूट के पात्र को फोड़ डालो-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

उठो फूट के पात्र को फोड़ डालो-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans उठो फूट के पात्र को फोड़ डालो, अभी भेद की शृंखला तोड़ डालो, भटकते दिलों को पुनः जोड़ डालो, समय की प्रबल धार को मोड़ डालो, विषैली विषमता मिटाते चलो तुम। सभी को गले से लगाते चलो तुम॥ स्वयं जाग कर दूसरों को जगा दो, अभी नाव को तुम किनारे लगा दो, उठो इस धरा को…

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मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans तू चाहे चंचलता कह ले, तू चाहे दुर्बलता कह ले, दिल ने ज्यों ही मजबूर किया, मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा। यह प्यार दिए का तेल नहीं, दो चार घड़ी का खेल नहीं, यह तो कृपाण की धारा है, कोई गुड़ियों का खेल नहीं। तू चाहे नादानी कह ले, तू चाहे मनमानी कह ले, मैंने जो भी रेखा…

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भेड़ियों के ढंग-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

भेड़ियों के ढंग-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans देखिये कैसे बदलती आज दुनिया रंग आदमी की शक्ल, सूरत, आचरण में भेड़ियों के ढंग द्रौपदी फिर लुट रही है दिन दहाड़े मौन पांडव देखते है आंख फाड़े हो गया है सत्य अंधा, न्याय बहरा, और धर्म अपंग नीव पर ही तो शिखर का रथ चलेगा जड़ नहीं तो तरु भला कैसे फलेगा देखना आकाश में कब तक उड़ेगा, डोर–हीन…

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तू तो सौंदर्य का विकास लगे-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

तू तो सौंदर्य का विकास लगे-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans तू तो सौंदर्य का विकास लगे काम-रति का निजी निवास लगे संगमरमर-सा रंग देख तेरा चाँद पूनम का भी उदास लगे रात के समय जब कभी निकले घुप अँधेरे में भी उजास लगे है खिला बसंत-सा यौवन तन में कस्तुरी की सुवास लगे तेरे होठों से रसकलश छलके तेरी झिड़की में भी मिठास लगे मूर्ति है तू…

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 कब तक यूं बहारों में पतझड़ का चलन होगा-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

कब तक यूं बहारों में पतझड़ का चलन होगा-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans कब तक यूं बहारों में पतझड़ का चलन होगा? कलियों की चिता होगी, फूलों का हवन होगा हर धर्म की रामायण युग-युग से ये कहती है सोने का हरिण लोगे, सीता का हरण होगा जब प्यार किसी दिल का पूजा में बदल जाए हर पल आरती होगी, हर शब्द भजन होगा जीने की कला…

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मन में सपने अगर नहीं होते-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans

मन में सपने अगर नहीं होते-ग़ज़लें व गीत-उदयभानु हंस -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Uday Bhanu Hans मन में सपने अगर नहीं होते हम कभी चाँद पर नहीं होते सिर्फ़ जंगल में ढूँढ़ते क्यों हो भेड़िए अब किधर नहीं होते कब की दुनिया मसान बन जाती उसमें शायर अगर नहीं होते किस तरह वो ख़ुदा को पाएँगे खुद से जो बेख़बर नहीं होते पूछते हो पता ठिकाना क्या हम फकीरों के घर नहीं होते

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