श्रंगार सोरठा-रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shringar-Sortha

श्रंगार सोरठा-रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Shringar-Sortha गई आगि उर लाय, आगि लेन आई जो तिय । लागी नाहिं, बुझाय, भभकि भभकि बरि-बरि उठै ।।1।। तुरुक गुरुक भरिपूर, डूबि डूबि सुरगुरु उठै । चातक चातक दूरि, देह दहे बिन देह को ।।2।। दीपक हिए छिपाय, नबल वधू घर ले चली । कर विहीन पछिताय, कुच लखि जिन सीसै धुनै ।।3।। पलटि चली मुसुकाय दुति रहीम उपजात अति । बाती सी उसकाय मानों दीनी दीन की ।।4।।…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 7

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 7 सदा नगारा कूच का, बाजत आठों जाम। रहिमन या जग आइ कै, को करि रहा मुकाम॥ सब को सब कोऊ करै, कै सलाम कै राम। हित रहीम तब जानिए, जब कछु अटकै काम॥ सबै कहावै लसकरी, सब लसकर कहँ जाय। रहिमन सेल्‍ह जोई सहै, सो जागीरैं खाय॥ समय दसा कुल देखि कै, सबै करत सनमान। रहिमन दीन अनाथ को, तुम बिन को भगवान॥ समय परे ओछे…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 6

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 6 यह न रहीम सराहिये, देन लेन की प्रीति। प्रानन बाजी राखिये, हारि होय कै जीति॥ यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय। बैर, प्रीति, अभ्‍यास, जस, होत होत ही होय॥ यह रहीम मानै नहीं, दिल से नवा जो होय। चीता, चोर, कमान के, नये ते अवगुन होय॥ याते जान्‍यो मन भयो, जरि बरि भस्‍म बनाय। रहिमन जाहि लगाइये, सो रूखो ह्वै जाय॥ ये रहीम…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 5

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 5 पन्‍नग बेलि पतिव्रता, रति सम सुनो सुजान। हिम रहीम बेली दही, सत जोजन दहियान॥ परि रहिबो मरिबो भलो, सहिबो कठिन कलेस। बामन है बलि को छल्‍यो, भलो दियो उपदेस॥ पसरि पत्र झँपहि पितहिं, सकुचि देत ससि सीत। कहु र‍हीम कुल कमल के, को बैरी को मीत॥ पात पात को सींचिबो, बरी बरी को लौन। रहिमन ऐसी बुद्धि को, कहो बरैगो कौन॥ पावस देखि रहीम मन, कोइल…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 4

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 4 टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटे सौ बार। रहिमन फिरि फिरि पोहिए, टूटे मुक्‍ताहार॥ तन रहीम है कर्म बस, मन राखो ओहि ओर। जल में उलटी नाव ज्‍यों, खैंचत गुन के जोर॥ तब ही लौ जीबो भलो, दीबो होय न धीम। जग में रहिबो कुचित गति, उचित न होय रहीम॥ तरुवर फल नहिं खात हैं, सरबर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 3

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 3 चरन छुए मस्‍तक छुए, तेहु नहिं छाँड़ति पानि। हियो छुवत प्रभु छोड़ि दै, कहु रहीम का जानि॥ चारा प्‍यारा जगत में, छाला हित कर लेय। ज्‍यों रहीम आटा लगे, त्‍यों मृदंग स्‍वर देय॥ चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह। जिनको कछू न चाहिए, वे साहन के साह॥ चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस। जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस॥ चिंता बुद्धि परेखिए, टोटे…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 2

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 2 कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्‍वाति एक गुन तीन। जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन॥ कमला थिर न रहीम कहि, यह जानत सब कोय। पुरुष पुरातन की बधू, क्‍यों न चंचला होय॥ कमला थिर न रहीम कहि, लखत अधम जे कोय। प्रभु की सो अपनी कहै, क्‍यों न फजीहत होय॥ करत निपुनई गुन बिना, रहिमन निपुन हजूर। मानहु टेरत बिटप चढ़ि मोहि समान को कूर॥ करम हीन रहिमन…

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दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 1

दोहे -रहीम -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahim Dohe Part 1 अच्‍युत-चरण-तरंगिणी, शिव-सिर-मालति-माल। हरि न बनायो सुरसरी, कीजो इंदव-भाल॥ अधम वचन काको फल्‍यो, बैठि ताड़ की छाँह। रहिमन काम न आय है, ये नीरस जग माँह॥ अन्‍तर दाव लगी रहै, धुआँ न प्रगटै सोइ। कै जिय आपन जानहीं, कै जिहि बीती होइ॥ अनकीन्‍हीं बातैं करै, सोवत जागे जोय। ताहि सिखाय जगायबो, रहिमन उचित न होय॥ अनुचित उचित रहीम लघु, क‍रहिं बड़ेन के जोर। ज्‍यों ससि के संजोग…

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