Dr. Rahat Indori Teri Parchhaai Mere Ghar Se Nahi Jaati Hai

Teri Parchhaai Mere Ghar Se Nahi Jaati Hai Teri parchhaai mere ghar se nahi jaati hai Tu kahin ho mere andar se nahi jaati hai Aasmaan maine tujhe sar pe utha rakha hai Ye hai tohmat jo mere sar se nahin jaati hai Dukh to ye hai ke abhi apni safein tirchhi hain Ye buraai mere lashkar se nahin jaati hai Taj machhli ne safaai ka pehen rakha hai Gandgi hai ke samandar se nahin jaati hai…

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Teri Parchhaai Mere Ghar Se Nahi Jaati Hai ( In Hindi)-तेरी परछाई मेरे घर से नहीं जाती है-Rahat Indori-   – राहत इंदौरी

Teri Parchhaai Mere Ghar Se Nahi Jaati Hai ( In Hindi)-तेरी परछाई मेरे घर से नहीं जाती है-Rahat Indori-   – राहत इंदौरी   Teri Parchhaai Mere Ghar Se Nahi Jaati Hai Teri parchhaai mere ghar se nahi jaati hai Tu kahin ho mere andar se nahi jaati hai Aasmaan maine tujhe sar pe utha rakha hai Ye hai tohmat jo mere sar se nahin jaati hai Dukh to ye hai ke abhi apni safein tirchhi hain Ye…

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राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori

राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 8 नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 7 नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 6 नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 5 नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 4 नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita…

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नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 8

नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 8 किसने दस्तक दी है दिल पर कौन है किसने दस्तक दी है दिल पर कौन है आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है रौशनी ही रौशनी है हर तरफ़ मेरी आँखों में मुन्नवर कौन है आसमां झुक-झुक के करता है सवाल आपके कद के बराबर कौन है हम रखेंगें अपने अश्कों का हिसाब पूछने वाला समंदर कौन है सारी दुनिया हैरती है किस लिए दूर…

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नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 7

नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 7 ये सर्द रातें भी बन कर अभी धुआँ उड़ जाएँ ये सर्द रातें भी बन कर अभी धुआँ उड़ जाएँ वह इक लिहाफ़ मैं ओढूँ तो सर्दियाँ उड़ जाएँ ख़ुदा का शुक्र कि मेरा मकाँ सलामत है हैं इतनी तेज़ हवाएँ कि बस्तियाँ उड़ जाएँ ज़मीं से एक तअल्लुक़ ने बाँध रक्खा है बदन में ख़ून नहीं हो तो हड्डियाँ उड़ जाएँ बिखर-बिखर सी गई…

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नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 6

नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 6 चराग़ों को उछाला जा रहा है चराग़ों को उछाला जा रहा है हवा पर रोब डाला जा रहा है न हार अपनी न अपनी जीत होगी मगर सिक्का उछाला जा रहा है वो देखो मय-कदे के रास्ते में कोई अल्लाह-वाला जा रहा है थे पहले ही कई साँप आस्तीं में अब इक बिच्छू भी पाला जा रहा है मिरे झूटे गिलासों की छका कर बहकतों…

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नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 5

नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 5 तो क्या बारिश भी ज़हरीली हुई है तो क्या बारिश भी ज़हरीली हुई है हमारी फ़स्ल क्यों नीली हुई है ये किसने बाल खोले मौसमों के हवा क्यों इतनी बर्फ़ीली हुई है किसी दिन पूछिये सूरजमुखी से कि रंगत किसलिये पीली हुई है सफ़र का लुत्फ़ बढ़ता जा रहा है ज़मीं कुछ और पथरीली हुई है सुनहरी लग रहा है एक-एक पल कई सदियों में…

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नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 4

नाराज़ -राहत इन्दौरी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rahat Indori Part 4 जितने अपने थे, सब पराए थे जितने अपने थे, सब पराए थे हम हवा को गले लगाए थे जितनी क़समें थीं, सब थीं शर्मिंदा, जितने वादे थे सर झुकाए थे जितने आंसू थे सब थे बेगाने जितने मेहमां थे बिन बुलाए थे सब क़िताबें पढ़ी-पढ़ाई थीं, सारे क़िस्से सुने-सुनाए थे एक बंजर ज़मीं के सीने में मैंने कुछ आसमां उगाए थे वरना औक़ात क्या थी…

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