संयुक्त परिवार-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

संयुक्त परिवार-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak कलयुग के वन में घर-परिवार के संसद सदन में, रीति रिवाज बकवास-बंडल, परिजन मंत्रिमण्डल, सास के आगे बहू दोनों की क्या कहूँ गृह कार्य में दक्ष हैं, सशक्त विपक्ष हैं, उखड़े-उखड़े मन, बाहर से समर्थन हरकतें ठीक वैसी की वैसी, 'लोकतंत्र' ऐसी की तैसी रसोइयाँ दल-बदल रही हैं, आधुनिकता छाती पर मूँग दल रही है, संयुक्त परिवार एक सरकार, सरकार, बस चल रही है।

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 वायदों की छुरी-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

वायदों की छुरी-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak राजनीति की गलियाँ संकरी हो गई हैं, आम जनता खूँटे से बँधी बकरी हो गई है, चुनाव के त्यौहार तक मतदान के वार तक, खिला-पिलाकर लाल करते हैं, वायदों की छुरी से हलाल करते हैं।

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 महान भारत-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

महान भारत-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak महान भारत में कलयुग की महाभारत में, नेता के हाथ में तीर कमान जनता है, दुर्योधन और दु:शासन नेता ही बनता है, द्रौपदी कौन? आम जनता है, पाण्डवों पर आज भी कौरव भारी है, द्रौपदी का चीरहरण अनवरत जारी है।

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फ्रंटपेज पर-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

फ्रंटपेज पर-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak आतंकवादी आए घबराये-से सब चिल्लाए, अचानक बम विस्फोट गरीबों पर चोंट, सब दुम दबाकर भागे, नेताजी सबसे आगे, जलते अंगारों पे रोटियाँ सेंकने लगे हालातों को शिकारी निगाहों से देखने लगे, दूसरे ही दिन मखमली सेज पर थे, घड़ियाली आँसू फ्रंट पेज पर थे।

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 प्रेम-व्यथा-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

प्रेम-व्यथा-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak रंगीन मुलाकातें रोज़ होती थी, पच्चीस बरस तक हम दोनों पति-पत्नी की बड़ी मौज होती थी, फिर खुशियाँ ऐसी रूठी कि आधी हो गई, क्या बताए २६ वें बरस हमारी शादी हो गई।

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प्रश्नवाचक चिह्न-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

प्रश्नवाचक चिह्न-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak प्रश्नवाचक चिह्न नेता हो गए माफिया डॉन, धन्ना सेठ चुकते हैं लॉन, रिश्वत के आगे पगारे गौण फिर भी चुप्पी सन्नाटा, मौन, बेटा बाप से पूछे हम आपके कौन, वीरप्पन बना जिन्न नेता करे ताक धिनाधिन्न, स्पेशल टास्क फोर्स छिन्न भिन्न, राजनीति से आने लगी घिन्न, इमानदार का मन खिन्न यथार्थ आदर्शों से स्पर्धा भिन्न, लोकतंत्र के सामने? प्रश्न वाचक चिह्न

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राज़ की बात-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

राज़ की बात-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak शेर सिंह मोटा ताज़ा पूरे जंगल का राजा, वेजीटेरियन हो गया पशुओं के प्रेम में खो गया नज़ारा इतना विचित्र हो गया शिकार था जो पहले अब वो मित्र हो गया दुश्मनों में प्यार उमड़ आया था, पता है! जंगल में चुनाव आया था।

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आरोप-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

आरोप-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak नेताजी अक्ल के कच्चे, घर में जन्में जुड़वाँ बच्चे, एक पत्रकार ने कहा, सब ईश्वर की लीला प्रभु की करामात है। नेताजी बोले, "ज़रूर विपक्ष का हाथ है।"

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