निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli हमेशा यूँ ही होता है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli जानता नहीं कोई-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli एक मुस्कुराहट-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli याद आता है सुना था पहले-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi…

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हमेशा यूँ ही होता है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

हमेशा यूँ ही होता है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli हमेशा यूँ ही होता है घनी ख़ामोशियों के चुप अँधेरों में कोई मिसरा कोई पैकर अचानक बेइरादा उड़ते जुगनू-सा चमकता है उसी की झिलमिलाहट में कभी धुँधला कभी रौशन बिना लफ़्ज़ों की पूरी नज़्म का चेहरा झलकता है वो मिसरा या कोई पैकर छुपा रहता है जो अकसर गुज़रते रास्तों में गीत गाते ख़ाली प्यालों में गली-कूचों में…

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जानता नहीं कोई-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

जानता नहीं कोई-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli शायरी वहाँ है जहाँ शायरी नहीं होती रौशनी वहाँ है जहाँ रौशनी नहीं होती आदमी वहाँ है जहाँ आदमी नहीं होता शायरी-के लफ़्ज़ों में रौशनी की शम्‌ओं में आदमी के चेहरों में जुस्तजू है बेमानी अब जहाँ भी जो शय है वो...! वहाँ नहीं होती आग को समन्दर में नग़मग़ी को पत्थर में जंग को कबूतर में ढूँढ़ने का जोखम…

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एक मुस्कुराहट-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

एक मुस्कुराहट-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli चमकते बत्तीस मोतियोंवाली मुस्कुराहट खुला हुआ बादबान जैसे धुला हुआ आसमान जैसे सहर की पहली अज़ान जैसे पता नहीं नाम क्‍या है उसका ख़बर नहीं काम क्‍या है उसका वो ठीक छे बज के बीस की एक जगमगाहट उतर के होठों से यूँ मेरे साथ चल रही है न छाँव कुछ कम है रास्तों में न धूप ज़्यादा निकल रही है…

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याद आता है सुना था पहले-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

याद आता है सुना था पहले-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli याद आता है सुना था पहले कोई अपना भी ख़ुदा था पहले मैं वो मक़तूल जो क़ातिल न बना हाथ मेरा भी उठा था पहले जिस्म बनने में उसे देर लगी इक उजाला-सा हुआ था पहले फूल जो बाग़ की ज़ीनत ठहरा मेरी आँखों में खिला था पहले आसमाँ, खेत, समन्दर सब लाल खून काग़ज़ पे उगा…

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ये ख़ून मेरा नहीं है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

ये ख़ून मेरा नहीं है-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli तुम्हारी आँखों में आज किसके लहू की लाली चमक रही है ये आग कैसी दहक रही है पता नहीं तुमने मेरे धोके में किस पे ख़ंजर चला दिया है वो कौन था किसके रास्ते का चराग़ तुमने बुझा दिया है ये ख़ून मेरा नहीं है लेकिन तुम्हें भी शायद ख़बर नहीं थी जहाँ निशाना लगाये बैठे थे वो…

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मेरा घर-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

मेरा घर-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli जिस घर में अब मैं रहता हूँ वो मेरा है इसके कमरों की आराइश इसके आँगन की ज़ेबाइश अब मेरी है मुझसे पहले मुझसे पहले से भी पहले ये घर किस-किस का अपना था किन-किन आँखों का सपना था कब-कब इसका क्या नक़्शा था? ये सब तो कल का क़िस्सा है, इसका आज मेरा हिस्सा है आज के, कल बन जाने…

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मुझी में ख़ुदा था-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

मुझी में ख़ुदा था-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli मुझे याद है मेरी बस्ती के सब पेड़ पर्वत हवाएँ परिन्दे मेरे साथ रोते थे हँसते थे मेरे ही दुख में दरिया किनारों पे सर को पटकते थे मेरी ही खुशियों में फूलों पे शबनम के मोती चमकते थे यहीं सात तारों के झुरमुट में लाशक्ल-सी जो खुनक रोशनी थी वहीं जुगनुओं की चिराग़ों की बिल्ली की आँखों की…

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