कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi सोज़े फिराक़ (विरह की आग)-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi अलफिराक (जुदाई)-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi गिला-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi  फ़हमाइश-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi राज़ी और रज़ा-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi गिरफ़्तारिए दिल-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी…

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अलफिराक (जुदाई)-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

अलफिराक (जुदाई)-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi जब से तुमको ले गया है ये फलक अज़लम कहीं। जी तरसता है कहीं और चश्म है पुरनम कहीं॥ हम पे जो गुजरा है वह गुजरा किसी पर ग़म कहीं। नै तसल्ली है न दिल को चैन है इकदम कहीं॥ छूट जावें ग़म के हाथों से जो निकले दम कहीं। खा़क ऐसी ज़िन्दगी पर तुम कहीं और हम कहीं॥ तुम वहाँ बैठे हो हम यां…

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गिला-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

गिला-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi उस शोख के सितम का गिला आह क्या करूँ। तन सूख कर हुआ है मेरा काह क्या करूँ॥ बहते हैं अश्क शामो सहर गाह क्या करूँ। मिलता नहीं है तो भी वह गुमराह क्या करूँ॥ फुर्सत तो साँस की भी नहीं आह! क्या करूँ। क्या बेबसी है ऐ मेरे अल्लाह! क्या करूँ॥ जिस दिन से उस से आन के फूटा मेरा नसीब। दिल भर के एक…

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 फ़हमाइश-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

फ़हमाइश-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi अपने ग़म ख़्वारों से कोई आन हँस ले बोल ले। दर्दमन्दों का निकाल अरमान हँस ले बोल ले॥ फिर कहाँ में दिलबरी ये शान हँस ले बोल ले। दम ग़नीमत है अरे नादान हँस ले बोल ले॥ मान ले कहना मेरा ऐ जान! हँस ले बोल ले। हुस्न ये दो दिन का है मेहमान हँस ले बोल ले॥ आज तुझको हक़ ने दी है हुस्नों खूबी…

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राज़ी और रज़ा-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

राज़ी और रज़ा-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi गर तुझ में ऐ परीरू! या मेहर या जफा है। या रास्ती का मिलना, या सर ब सरदग़ा है॥ कर तू वही जो तेरे, अब दिल को खुश लगा है। हम जानते नहीं हैं, कुछ नेको बद कि क्या है॥ राज़ी हैं हम उसी में जिसमें तेरी रज़ा है। याँ यूं भी वाह वा है और बूँ भी वाह वा है॥ कुछ दिल में…

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गिरफ़्तारिए दिल-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

गिरफ़्तारिए दिल-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi जिस दिन से अदा मुझको उस बुत की लगी प्यारी। और खप गयी आँखों में चंचल की तरह दारी॥ दिल फँस गया जुल्फों में उस शोख़ के इकबारी। दिवानगी आ पहुँची जाती रही होशियारी॥ क्या कीजिए हुई अब तो याँ दिल की गिरफ़्तारी॥ मिलता हूँ जो टुक जाकर तो मुझसे वह लड़ता है। कुछ बात जो कहता हूँ झुँझला के झगड़ता है॥ गर्दन को पकड़…

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शौके दीद-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

शौके दीद-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi दिखला के झमक जिसको टुक चाह लगा दीजे। फिर उसको बहुत, ऐ जाँ बाला न बता दीजे॥ सौ नाज़ अगर कीजे उफ़त भी जता दीजे॥ मंजर के ज़रा दर को आगे से हटा दीजे॥ फिर एक नज़र अपने मुखड़े को दिखा दीजे॥ देखी है तुम्हारे जो चेहरे की झमक ऐ जां। दिल सीने में तड़पे है जो देख ले फिर एक आँ॥ है हमको बहुत…

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दिलबरी-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

दिलबरी-कविता-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi है दाम बिछा उसकी जुल्फ़ों के हर इक बल में। जादू है निगाहों में औ सहर है काजल में॥ सर पावों से शोख़ी है उस चुलबुले चंचल में। चितवन की लगावट ने एक आन की छल बल में॥ पलकों की झपक दिखला दिल छल लिया इक पल में। करने से खबरदारी हरगिज न हुआ लाहा॥ और एक के सीने को अय्यार ने ले राहा। उस शोख़…

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