ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals हाकिम-ए-आ’ला-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals  चलो सजदों में झुक जायें-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals सूरत-ए-अहवाल-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals गुज़रते हैं हम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals सफ़र का सामाँ तो है !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals उम्र-क़ैद…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem |…

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हाकिम-ए-आ’ला-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

हाकिम-ए-आ'ला-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals जिसका ये सब करम, वो हाकिम-ए-आ'ला आसमानी है यहाँ जो भी, जब भी होता है, सब उसकी हुक्म-रानी है! हम अदना से इंसान, हम सबके बस में कुछ भी तो नहीं ये दुनिया और ये नेमतें तमाम, सब रब की मेहरबानी है! दुख-सुख साथ ही रहते हैं, मुनहसिर है कुछ हम पर भी दिल दुखी तो फ़ज़ा उदास है, वर्ना हर-सू शादमानी है! जो कल था वो…

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 चलो सजदों में झुक जायें-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

चलो सजदों में झुक जायें-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals सांस बोझल है इन दिनों, फ़ज़ा भी कुछ भारी है दिलों में मायूसी है और आँखों में अश्क-बारी है! चेहरे सब सहमे हुए, सारे जहाँ में ख़ौफ़ तारी है दहशत का माहौल, कैसी मनहूस ये आज़ारी है! किस क़दर इस दौर में, बेबसी आज हमारी है फ़िक्रमंद निगाहें हैं, हरेक चेहरे पर लाचारी है! अंजाम को क़रीब पाके, थर्रायी ख़ल्क़त सारी है किसीके…

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सूरत-ए-अहवाल-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

सूरत-ए-अहवाल-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals इस दौर से पहले कब इतना रंजूर हुआ है यह इंसान कब इस क़दर मजबूर हुआ है ! अपनी हस्ती पर नाज़ था, दौलत पे ग़ुरूर जो भी तकब्बुर था सब चकनाचूर हुआ है ! अपनों से भी न मिलने के बहाने ढूंढता था वक़्त की ऐसी मार कि सब से दूर हुआ है ! ख़ुदा का ख़याल था, न शुक्राने की परवाह हर बंदा अब उसी…

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गुज़रते हैं हम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

गुज़रते हैं हम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals ठोकरों से ही सीख कर निखरते हैं हम नाकामी से क्यों इस क़दर डरते हैं हम! उतार-चढ़ाव तो ज़िन्दगी का हिस्सा हैं कभी डूबते हैं और कभी उभरते हैं हम! एक अजब सा रिश्ता है दोनों के बीच टूटता अगर दिल है तो बिखरते हैं हम! मिट्टी है सब मिट्टी में सबको मिलना है किस लिए फिर यूँ बनते संवरते हैं हम! उम्र गुज़र गई…

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सफ़र का सामाँ तो है !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

सफ़र का सामाँ तो है !-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals सरक रहा आहिस्ता-आहिस्ता आसमाँ तो है निकल रहा दम के साथ-साथ अरमाँ तो है! जल रहा है रोज़ आँखों के आगे धुआं-धुआं हसरतों से बनाया था जो वही मकाँ तो है ! टूटे कई रिश्ते-नाते...बिछड़ गए कुछ अपने अश्क न सही आँखों में, दिल परेशाँ तो है ! दिखते हैं जो ख़ाली-हाथ, नज़र का धोखा है चंद शेर, कुछ नज़्में, सफ़र का…

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उम्र-क़ैद…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

उम्र-क़ैद…-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals आवाज़ आज भी देता हूँ, तुम्हें सुनायी देती नहीं मिलने की अब कोई उम्मीद दिखायी देती नहीं ! जीवन बिता डाला पूरा, जिसको हासिल करने में मंज़िल तो अब दिखती है, राह सुझायी देती नहीं ! ज़ख़्मी जिस्म-ओ-ज़मीर की गुहार सुनाई देती है रूह भी लहू-लुहान है पर कभी दुहायी देती नहीं ! गर फ़ितूर हो सहने का, दुःख अपनाना पड़ता है इतना मज़ा कोई भी तकलीफ़…

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बरसात का मौसम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals

बरसात का मौसम-ग़ज़लें-मोहनजीत कुकरेजा -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Mohanjeet Kukreja Ghazals इन दोनों के दरमियाँ कुछ रिश्ता तो है ज़रूर हरेक बारिश में यह दिल मचलता तो है ज़रूर शर्माते हुए छिपने की कोशिश हज़ार करता है भीगने के बाद हुस्न और निखरता तो है ज़रूर तमन्ना कुछ तो पहले ही जवान हुआ करती है बेताबियाँ बढ़ाने को चांद निकलता तो है ज़रूर इश्क़ पे क्या ज़ोर है चाहत को किसने रोका है अरमाँ की तपिश…

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