मैं कहीं और भी होता हूँ-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

मैं कहीं और भी होता हूँ-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan मैं कहीं और भी होता हूँ जब कविता लिखता कुछ भी करते हुए कहीं और भी होना धीरे-धीरे मेरी आदत-सी बन चुकी है हर वक़्त बस वहीं होना जहाँ कुछ कर रहा हूँ एक तरह की कम-समझी है जो मुझे सीमित करती है ज़िन्दगी बेहद जगह मांगती है फैलने के लिए इसे फैसले को ज़रूरी समझता हूँ और अपनी मजबूरी…

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जो बच रहा-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

जो बच रहा-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan पटना के निकट रेल-दुर्घटना में मृतकों की सूची में देख कर अपना नाम हरदयाल चौंक पड़े-“अरे, मैं तो अभी जिन्दा हूँ!” (फिर कौन था वह दूसरा, जो मारा गया? क्या कोई और भी हो सकता है मुझ जैसा ही?) विस्फोट असफल रहा। वे जिन्हें नहीं जीतना चाहिए था हार गए अपने आप। क़िले से उठता धुआँ लगता है कोई भीषण दुर्व्यवस्था हमारी रक्षा…

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मेरे दुःख-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

मेरे दुःख-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan मेरे दुःख अब मुझे चौकाते नहीं उनका एक रिश्ता बन गया है दूसरों के दुखों से विचित्र समन्वय है यह कि अब मुझे दुःस्वप्नों से अधिक जीवन का यथार्थ विचलित करता है अखबार पढ़ते हुए घबराहट होती- शहरों में बस्तियों में रोज यही हादसा होता- कि कोई आदमखोर निकलता माँ के बगल में सोयी बच्ची को उठा ले जाता – और सुबह-सुबह जो पढ़…

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मामूली ज़िन्दगी जीते हुए-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

मामूली ज़िन्दगी जीते हुए-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan जानता हूँ कि मैं दुनिया को बदल नहीं सकता, न लड़ कर उससे जीत ही सकता हूँ हाँ लड़ते-लड़ते शहीद हो सकता हूँ और उससे आगे एक शहीद का मकबरा या एक अदाकार की तरह मशहूर... लेकिन शहीद होना एक बिलकुल फ़र्क तरह का मामला है बिलकुल मामूली ज़िन्दगी जीते हुए भी लोग चुपचाप शहीद होते देखे गए हैं

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बीमार नहीं है वह-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

बीमार नहीं है वह-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan बीमार नहीं है वह कभी-कभी बीमार-सा पड़ जाता है उनकी ख़ुशी के लिए जो सचमुच बीमार रहते हैं। किसी दिन मर भी सकता है वह उनकी खुशी के लिए जो मरे-मरे से रहते हैं। कवियों का कोई ठिकाना नहीं न जाने कितनी बार वे अपनी कविताओं में जीते और मरते हैं। उनके कभी न मरने के भी उदाहरण हैं उनकी ख़ुशी के…

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प्यार के बदले-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

प्यार के बदले-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan कई दर्द थे जीवन में : एक दर्द और सही, मैंने सोचा -- इतना भी बे-दर्द होकर क्या जीना ! अपना लिया उसे भी अपना ही समझ कर जो दर्द अपनों ने दिया प्यार के बदले...

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प्यार की भाषाएँ-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

प्यार की भाषाएँ-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan मैंने कई भाषाओँ में प्यार किया है पहला प्यार ममत्व की तुतलाती मातृभाषा में... कुछ ही वर्ष रही वह जीवन में: दूसरा प्यार बहन की कोमल छाया में एक सेनेटोरियम की उदासी तक : फिर नासमझी की भाषा में एक लौ को पकड़ने की कोशिश में जला बैठा था अपनी उंगुलियां: एक परदे के दूसरी तरफ़ खिली धूप में खिलता गुलाब बेचैन शब्द…

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पवित्रता-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

पवित्रता-कविताएँ -कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan कुछ शब्द हैं जो अपमानित होने पर स्वयं ही जीवन और भाषा से बाहर चले जाते हैं 'पवित्रता' ऐसा ही एक शब्द है जो अब व्यवहार में नहीं, उसकी जाति के शब्द अब ढूंढें नहीं मिलते हवा, पानी, मिट्टी तक में ऐसा कोई जीता जागता उदहारण दिखाई नहीं देता आजकल जो सिद्ध और प्रमाणित कर सके उस शब्द की शत-प्रतिशत शुद्धता को ! ऐसा ही…

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