कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal प्रसारित हुआ है-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal कुछ नहीं कर पा रहे तुम-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal कुछ नहीं करता कोई-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal तुम कुछ हो-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal चुप-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath…

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प्रसारित हुआ है-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

प्रसारित हुआ है-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   प्रसारित हुआ है वरिष्ठ नेता का त्यागपत्र। अकारण टूटा है चुनाव के पूर्व सहकार; चालू हुआ है नया-नया विघटन; फूट ही पड़ा है लावा अग्नि पहाड़ के अन्दर से; डोल-डोल डोल गई राजनीति; व्याप गई जनता में हाड़-तोड़ हलचल; दौड़-दौड़ दौड़ पड़ी ओठों से कानों तक कहा-सुनी; नाच-नाच नाच उठीं समाचार पत्रों में सुर्खियाँ; धमाधम धड़की है, धड़ल्ले से धरती; तड़क-तड़क टूटे हैं-फूटे…

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कुछ नहीं कर पा रहे तुम-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

कुछ नहीं कर पा रहे तुम-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   कुछ नहीं कर पा रहे तुम करने के काम से उनकी तरह कतरा रहे तुम; न किए का बोध गर्भ की तरह असमय गिरा रहे तुम; गर्व से ढमाढम ढोल खोखला बजा रहे तुम; दृष्टि में उठे अपनी दूसरों की दृष्टि में गिरे जा रहे तुम; कुछ नहीं कर पा रहे तुम सरेआम एक दूसरे को लतिया रहे तुम; पार्टी…

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कुछ नहीं करता कोई-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

कुछ नहीं करता कोई-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   कुछ नहीं करता कोई और करते सब हैं कुछ न कुछ किए-न-किए के बराबर। कुछ नहीं जीते कोई और जीते सब हैं कुछ-न-कुछ जिए-न-जिए के बराबर। कुछ नहीं होते कोई और होते सब हैं कुछ-न-कुछ हुए-न-हुए के बराबर। रचनाकाल: १३-१०-१९६८  

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तुम कुछ हो-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

तुम कुछ हो-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   तुम भी कुछ हो लेकिन जो हो वह कलियों में- रूप-गंध की लगी गाँठ है जिसे उजाला धीरे-धीरे खोल रहा है। रचनाकाल: २५-०३-१९५८  

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चुप-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

चुप-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   चुप भी एक पौधा है पत्थर का बना हुआ आँसू पर उगा हुआ दीपक पर खड़ा हुआ वायु चली, लेकिन वह उड़ा नहीं ठंड पड़ी, लेकिन वह गला नहीं रात हुई, लेकिन वह सोया नहीं सुबह हुई, लेकिन वह जगा नहीं बीते दिन, लेकिन वह खोया नहीं बोलता है, लेकिन इस धीरे से कि उसको हम सुनते नहीं, सुनने का प्रयास करें तब भी सुन…

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दिन बीत गया-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

दिन बीत गया-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   दिन, बीत गया, अब रीत गया, जमुना-जल के छलके-छलके मृग-मारुत के पग से चलके हलके-हलके बिजना झलके रचनाकाल: ०७-०२-१९५६  

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अजेय ही अड़े रहो-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal

अजेय ही अड़े रहो-कविताएँ-केदारनाथ अग्रवाल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kedarnath Agarwal   मेरे तन तने रहो आँधी में-आह में दृढ़-से-दृढ़ बने रहो शाप से प्रताड़ित भी व्यंग्य से विदारित भी मेरे तन खड़े रहो आफत में आँच से अजेय ही अड़े रहो रचनाकाल: ०१-०९-१९५६  

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