जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar

जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 5 क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 4 क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 3 क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 2…

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क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 5

क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 5 याद-ए-माज़ी में यूँ ख़याल तिरा याद-ए-माज़ी में यूँ ख़याल तिरा डाल देता है दिल में इक हलचल दौड़ते में किसी हसीना का जैसे आ जाए पाँव में आँचल यूँ दिल की फ़ज़ा में खेलते हैं यूँ दिल की फ़ज़ा में खेलते हैं रह रह के उमीद के उजाले छुप छुप के कोई शरीर लड़की आईने का अक्स जैसे डाले यूँ ही…

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क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 4

क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 4 एक कमसिन हसीन लड़की का एक कमसिन हसीन लड़की का इस तरह फ़िक्र से है मुखड़ा माँद जैसे धुँदली कोहर चमेली पर जैसे हल्की घटा के अंदर चाँद कितनी मासूम हैं तिरी आँखें कितनी मासूम हैं तिरी आँखें बैठ जा मेरे रू-ब-रू मिरे पास एक लम्हे को भूल जाने दे अपने इक इक गुनाह का एहसास चंद लम्हों को तेरे आने…

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क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 3

क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 3 अच्छी है कभी-कभी की दूरी भी सखी अच्छी है कभी-कभी की दूरी भी सखी इस तरह मुहब्बत में तड़प आती है कुछ और भी वो चाहने लगते हैं मुझे कुछ और भी मेरी प्यास बढ़ जाती है अपने आईना-ए-तमन्ना में अपने आईना-ए-तमन्ना में अब भी मुझ को सँवारती है तू मैं बहुत दूर जा चुका लेकिन मुझ को अब तक पुकारती…

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क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 2

क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar part 2 बाहर वो जहाँ भी काम करते होंगे बाहर वो जहाँ भी काम करते होंगे रहते ही तो होंगे वो झुकाए हुए सर घर में भी न सर उठायेंगे तो सखी रह जाएगा उनका दम न सचमुच घुटकर मैं वो ही करूँ जो वो कहें वो चाहें मैं वो ही करूँ जो वो कहें वो चाहें मुझ को भी तो इस बात…

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क़ितयात  -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar अब तक वही बचने की सिमटने की अदा अब तक वही बचने की सिमटने की अदा हर बार मनाता है मेरा प्यार तुझे समझा था तुझे जीत चुका हूँ लेकिन लगता है कि जीतना है हर बार तुझे अंगड़ाई ये किस ने ली अदा से अंगड़ाई ये किस ने ली अदा से कैसी ये किरन फ़ज़ा में फूटी क्यूँ रंग बरस पड़ा चमन…

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रुबाइयाँ(क़ितयात ) -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar collections Part 3

रुबाइयाँ(क़ितयात ) -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar collections Part 3 वो दूर सफ़र पे जब भी जाएँगे सखी वो दूर सफ़र पे जब भी जाएँगे साड़ी कोई कीमती सी ले आएँगे चाहूँगी उसे सैंत के रख लूँ लेकिन पहनूँ न उसी दिन तो बिगड़ जाएँगे सीने पे पड़ा हुआ ये दोहरा आँचल सीने पे पड़ा हुआ ये दोहरा आँचल आँखों में ये लाज का लहकता काजल तहज़ीब की तस्वीर…

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रुबाइयाँ(क़ितयात ) -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar collections Part 2

रुबाइयाँ(क़ितयात ) -जाँ निसार अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Jaan Nisar Akhtar collections Part 2 नज़रों से मेरी खुद को बचाले कैसे नज़रों से मेरी खुद को बचाले कैसे खुलते हुए सीने को छुपाले कैसे आटे में सने हुए हैं दोनों ही हाथ आँचल जो सँभाले तो सँभाले कैसे दुनिया की उन्हें लाज न ग़ैरत है सखी दुनिया की उन्हें लाज न ग़ैरत है सखी उनका है मज़ाक़ मेरी आफ़त है सखी छेड़ेंगे मुझे…

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