गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal घर बचाना है तो बेटी बचा लो-(अंर्तराष्ट्रीय पुत्री दिवस)-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal चलो हरि के द्वार चलें-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal पीठ पीछे लौटता है कोई-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal गऊ सड़क पे चरती है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता…

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घर बचाना है तो बेटी बचा लो-(अंर्तराष्ट्रीय पुत्री दिवस)-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

घर बचाना है तो बेटी बचा लो-(अंर्तराष्ट्रीय पुत्री दिवस)-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal घर बचाना है तो बेटी बचा लो। वर बचाना है तो बेटी बचा लो। सबका बचना बहुत जरुरी है। गर बचाना है तो बेटी बचा लो। आज बेटी है कल नानी मां है। कल बचाना है तो बेटी बचा लो। किससे कब हाथ मागोगे भइया। कर बचाना है तो बेटी बचा लो। कुदरत कैसे चलेगी इसके…

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चलो हरि के द्वार चलें-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

चलो हरि के द्वार चलें-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal   चलो हरि के द्वार चलें। छोड़ घर परिवार चलें। गंगा स्नान तन का है। पापी मन संवार चलें। मन का स्नान राम है। राम नाम से पार चलें। मन तन में नहीं रहता। मन पर ही सवार चलें। तन मन से कब छूटेगा। अभी मन को मार चलें। पंच तत्व को भूल जाएं। अभी सब बिसार चलें। बाद में…

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पीठ पीछे लौटता है कोई-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

पीठ पीछे लौटता है कोई-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal पीठ पीछे लौटता है कोई। पीठ पीछे दौड़ता है कोई। न जाने हममें क्या देखा है। पीठ पीछे भौंकता है कोई। गड़गड़ाती बरसाती रात में। पीठ पीछे कौंधता है कोई। चलता हूं अपनी मस्ती में। पीठ पीछे चौंकता है कोई। मुख पे कभी कह न पाता। पीठ पीछे बोलता है कोई। दुम हिलाता चाकरी करता। पीठ पीछे डौलता है कोई।…

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गऊ सड़क पे चरती है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

गऊ सड़क पे चरती है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal   गऊ सड़क पे चरती है। गऊ सड़क पे मरती है। घर से बाहर भेजा हमने। गऊ सड़क पे अखरती है। माता का दिया है सम्मान। गऊ सड़क पे सड़ती है। तेंतीस करोड़ देव रहते। गऊ सड़क पे खलती है। तीर्थ कर लिए उम्र भर। गऊ सड़क पे जलती है। चारा नहीं मिला ढंग से। गऊ सड़क पे पलती है।…

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गैस उड़ रही है तेल जल रहा है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

गैस उड़ रही है तेल जल रहा है-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal गैस उड़ रही है तेल जल रहा है। अब तो खाना पीना खल रहा है। नमक ने स्वाद खारा कर दिया। कुक्कर में भी बन्दा गल रहा है। मोटर गाड़ी पकड़ में नहीं आती। कहीं आना जाना भी टल रहा है। दवा खासी कड़वी लगने लगी है। डॉक्टर फीस परीक्षण छल रहा है। इतिहास बन रहा है…

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आज नकद कल उधार चलेगा-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

आज नकद कल उधार चलेगा-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal आज नकद कल उधार चलेगा। अब ऐसे ही ये व्यापार चलेगा। आज ही उधार नहीं करना है। ऐसे तो नहीं कारोबार चलेगा। आज ही उधार कर लिया तो। कैसे अपना ये बेड़ा पार चलेगा। नकदी के बिना भी कुछ नहीं। फलता फूलता परिवार चलेगा। नकदी आती जाती रहेगी तो। ऐसे ही दो दो का चार चलेगा। उधार देके क्यूं रोना…

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कदम कदम पे जंग लड़ी-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal

कदम कदम पे जंग लड़ी-गुरदीप सिंह सोहल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurdeep Singh Sohal कदम कदम पे जंग लड़ी। हार कभी न मानी जानो। परिवार लुटाया धर्म कर्म में। इनके जैसा नहीं दानी जानो। बुरी हालत में डटकर रहना। हर मुसीबत पहचानी जानो। नानक ने मिशन शुरु किया। सबको बनाया ज्ञानी जानो। अंधकार से प्रकाश की ओर। यात्रा करने की ठानी जानो। तिलक जनेऊ की रक्षा में। त्यागमल की जुबानी जानो। हिन्द की चादर…

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