परमाणु के ख़िलाफ़-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

परमाणु के ख़िलाफ़-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   यह कोई जंग नहीं थी सोए शहरों में जागते सपनों के ख़िलाफ़। सदैव के वैर का शिखर था। नस्लकुशी की गिनी-गुथी साज़िश थी। नागासाकी न हिरोशिमा मिटा लाशें और मलबा लट लट जला फिर से जागा जापान। दैत्य की छाती पर चढ़ बैठा और गरजा! अब बोल! हम जिंदा हम जागते। हमारे बिन एक कदम चल कर दिखा। तेरी नब्ज़ अब हमारे हाथ…

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युद्ध का आखिरी दिन नहीं होता-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

युद्ध का आखिरी दिन नहीं होता-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   दशहरा युद्ध का आखि़री दिन नहीं दसवां दिन होता है। युद्ध तो जारी रखना पड़ता। सबसे पहले अपने ख़िलाफ़ जिसमें सदियों से रावण डेरा डाले बैठा है। तृष्णा का स्वर्णमृग छोड़ देता है रोज़ सवेरे हमें छलावे में लेता है। सादगी की सीता मैया को रोज़ छलता है फिर भी धर्मी कहलाता है सोने की लंका में बसते वह जान…

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मिल जाया कर-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

मिल जाया कर-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   इस तरह ही मिल जाया कर जीवित रहने का भ्रम बना रहता है। फ़िक्रों का चक्रव्यूह टूट जाता है कुछ दिन अच्छे गुज़र जाते हैं रातों की नींद नहीं उचटती मिल जाया कर। शाम सवेरे चलती है रहट अच्छी लगती है रहट की भरी बाल्टियों की कतार। सुबह शाम के बीच बचपन में सूरज देखना याद आता है। मिल जाया कर तुझे याद…

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कविता लिखा करो-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

कविता लिखा करो-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   कविता लिखा करो दर्दों को धरती मिलती है। कोरे पन्नों को सौंपा करो रूह का सारा भार। यह लिखने से नींद में खलल नहीं पड़ती। तुम्हारे पास बहुत कुछ है कविता जैसा सिर्फ स्वयं को अनुवाद करो पिघल जाओ सिर से पैरों तक आहों को शब्दों के परिधान पहनाओ। और कुछ नहीं करना झांझरों को आज से बेड़ियाँ मानना है गहना-आभूषण सुनहरे चुग्गे…

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युद्ध का आखिरी दिन नहीं होता-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

युद्ध का आखिरी दिन नहीं होता-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   दशहरा युद्ध का आखिरी दिन नहीं दसवां दिन होता है। युद्ध तो जारी रखना पड़ता। सबसे पहले अपने ख़िलाफ़ जिसमें सदियों से रावण डेरा डाले बैठा है। तृष्णा का स्वर्णमृग छोड़ देता है रोज़ सवेरे हमें छलावे में लेता है। सादगी की सीता मैया को रोज़ छलता है फिर भी धर्मी कहलाता है सोने की लंका में बसते वह जान…

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मिल जाया कर-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

मिल जाया कर-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   इस तरह ही मिल जाया कर जीवित रहने का भ्रम बना रहता है। फ़िक्रों का चक्रव्यूह टूट जाता है कुछ दिन अच्छे गुज़र जाते हैं रातों को नींद नहीं उचटती मिल जाया कर। शाम सवेरे चलती है रहट अच्छी लगती है रहट की भरी बाल्टियों की कतार। सुबह शाम के बीच बचपन में सूरज देखना याद आता है। मिल जाया कर तुझे याद…

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कविता लिखा करो-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

कविता लिखा करो-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   कविता लिखा करो दर्दो को धरती मिलती है। कोरे पन्नों को सौंपा करो रूह का सारा भार। यह लिखने से नींद में खलल नहीं पड़ती। तुम्हारे पास बहुत कुछ है कविता जैसा सिर्फ स्वयं को अनुवाद करो पिघल जाओ सिर से पैरों तक आहों को शब्दों के परिधान पहनाओ। और कुछ नहीं करना झांझरों को आज से बेड़ियाँ मानना है गहना-आभूषण सुनहरे चुग्गे…

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किधर गए असवार-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill

किधर गए असवार-गुरभजन गिल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gurbhajan Gill   जिनको था भ्रम भुलेखा, हम हैं वक़्त पर सवार वक़्त हमसे पूछ कर चलता, बहती है दरिया की धार। वृक्षों के पात हिलाएं हम। भ्रम सृजते, बड़के दावेदार। कहते थे जो बाँध बिठाएँ धरती, सूरज, आग औ' पानी पवन को गाँठे मार। किधर गए असवार। कहाँ गया रौनक मेला सफ़र सवारी जगत झमेला। एक ही भाव गुरु और चेला। तहख़ानों में दुबके सारे…

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