ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हँस के बोला करो बुलाया करो -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हसीन नग़्मा-सराओ! बहार के दिन हैं -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हवा सनके तो ख़ारों को बड़ी तकलीफ़…

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हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया वो ख़ुद पिला रहे थे मैं लहरा के पी गया तौबा के टूटने का भी कुछ कुछ मलाल था थम थम के सोच सोच के शर्मा के पी गया साग़र-ब-दस्त बैठी रही मेरी आरज़ू साक़ी शफ़क़ से जाम को टकरा के पी गया वो दुश्मनों…

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हँस के बोला करो बुलाया करो -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हँस के बोला करो बुलाया करो -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हँस के बोला करो बुलाया करो आप का घर है आया जाया करो मुस्कुराहट है हुस्न का ज़ेवर रूप बढ़ता है मुस्कुराया करो हदसे बढ़कर हसीन लगते हो झूठी क़स्में ज़रूर खाया करो हुक्म करना भी एक सख़ावत है हम को ख़िदमत कोई बताया करो बात करना भी बादशाहत है बात करना न भूल जाया करो ता के दुनिय…

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हसीन नग़्मा-सराओ! बहार के दिन हैं -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हसीन नग़्मा-सराओ! बहार के दिन हैं -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हसीन नग़्मा-सराओ! बहार के दिन हैं लबों की जोत जलाओ! बहार के दिन हैं तकल्लुफ़ात का मौसम गुज़र गया साहब! नक़ाब रुख़ से उठाओ बहार के दिन हैं गुलों की सेज तो तौहीन है हसीनों की दिलों की सेज बिछाओ बहार के दिन हैं बहार बीत गई तो तुम्हारी क्या इज़्ज़त सितम-ज़रीफ़ घटाओ! बहार के दिन हैं है उम्र-ए-रफ़्ता…

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हवा सनके तो ख़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हवा सनके तो ख़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हवा सनके तो ख़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है मिरे ग़म की बहारों को बड़ी तकलीफ़ होती है न छेड़ ऐ हम-नशीं अब ज़ीस्त के मायूस नग़्मों को कि अब बरबत के तारों को बड़ी तकलीफ़ होती है मुझे ऐ कसरत-ए-आलाम बस इतनी शिकायत है कि मेरे ग़म-गुसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है कहो मौजों से…

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हल्का हल्का सुरूर है साक़ी -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हल्का हल्का सुरूर है साक़ी -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हल्का हल्का सुरूर है साक़ी बात कोई ज़रूर है साक़ी तेरी आँखों को कर दिया सज्दा मेरा पहला क़ुसूर है साक़ी तेरे रुख़ पर है ये परेशानी इक अँधेरे में नूर है साक़ी तेरी आँखें किसी को क्या देंगी अपना अपना सुरूर है साक़ी पीने वालों को भी नहीं मालूम मय-कदा कितनी दूर है साक़ी

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हर दुश्मन-ए-वफ़ा मुझे महबूब हो गया -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हर दुश्मन-ए-वफ़ा मुझे महबूब हो गया -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हर दुश्मन-ए-वफ़ा मुझे महबूब हो गया जो मोजज़ा हुआ वो बहुत ख़ूब हो गया इश्क़ एक सीधी-सादी सी मंतिक़ की बात है रग़बत मुझे हुई तो वो मर्ग़ूब हो गया दीवानगी बग़ैर हयात इतनी तल्ख़ थी जो शख़्स भी ज़हीन था मज्ज़ूब हो गया मुजरिम था जो वो अपनी ज़ेहानत से बच गया जिस से ख़ता न की थी…

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हम से चुनाँ-चुनीं न करो हम नशे में हैं -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हम से चुनाँ-चुनीं न करो हम नशे में हैं -ग़ज़ल-अब्दुल हमीद अदम-Abdul Hameed Adam-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, हम से चुनाँ-चुनीं न करो हम नशे में हैं हम जो कहें नहीं न करो हम नशे में हैं नश्शा कोई ढकी-छुपी तहरीक तो नहीं हर-चंद तुम यक़ीं न करो हम नशे में हैं ऐसा न हो कि आप की बाँहों में आ गिरें आँखों को ख़शमगीं न करो हम नशे में हैं बातें करो निगार…

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