पंजाबी कविता(पदे)-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand 2

पंजाबी कविता(पदे)-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand आपे मेलि लई जी सुन्दर शोभावंती नारी आपे मेलि लई जी सुन्दर शोभावंती नारी करि क्रिपा सतिगुरू मनायआ लागी शहु नूं पयारी कूड़ा कूड़ ग्या सभ तन ते, फूल रही फुलवारी अंतरि साच निवास किया, गुर सतिगुर नदरि नेहारी शबद गुरू के कंचन काया, हउमै दुबिधा मारी गुन कामन करि कंतु रीझाया, सेवा सुरति बीचारी दया धारि गुर खोल्ह दिखाई, सबद सुरति की बारी गयान राउ नित…

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छंद-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand 2

छंद-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand 2 'चन्द' राग धुनि दूती प्रेमी की कहैं नेमी धुन सुन थकत, अचंभौ होइ रहै बजत प्रेम धुनि तार, अक्ल कउ लूट है हो श्रवण मध्य होइ पैठत, कबहू न छूट है । 'चन्द' प्रेम की बात, न काहूं पै कहो अतलस खर पहराय, कउन खूबी चहों बुधिवान तिंह जान, भेद निज राखई हो देवै सीस उतारि, सिररु नहिं भाखई । 'चन्द' माल अर मुल्क, जाहिं प्रभु दीयो…

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छंद-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand

छंद-चन्द-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Chand 'चन्द' प्यारो मितु, कहो क्यों पाईऐ करहु सेवा तिंह नित, नहिं चितह भुलाईऐ गुनि जन कहत पुकार, भलो या जीवनो हो बिन प्रीतम केह काम, अमृत को पीवनो । अंतरि बाहरि 'चन्द' एक सा होईऐ मोती पाथर एक, ठउर नहिं पाईऐ हिये खोटु तन पहर, लिबास दिखाईऐ हो परगटु होइ निदान, अंत पछुताईऐ । जब ते लागो नेहु, 'चन्द' बदनाम है आंसू नैन चुचात, आठु ही जाम है…

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