नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast पयामे-वफ़ा-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast नज़राने रूह-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast हुब्ब-ए-क़ौमी-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast वतन का राग-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast रामायण का एक सीन-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast मर्सिया बाल-गंगा-धर-तिलक-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi…

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पयामे-वफ़ा-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

पयामे-वफ़ा-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast हो चुकी क़ौम के मातम में बहुत सीनाज़नी अब हो इस रंग का सन्यास ये है दिल में ठनी मादरे-हिन्द की तस्वीर हो सीने पे बनी बेड़ियाँ पैर में हों और गले में क़फ़नी हो ये सूरत से अयाँ आशिक़े-आज़ादी है कुफ़्ल है जिनकी ज़बाँ पर यह वह फ़रियादी है आज से शौक़े वफ़ा का यही जौहर होगा फ़र्श काँटों का हमें फूलों का बिस्तर होगा…

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नज़राने रूह-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

नज़राने रूह-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast तेरा बन्दा रहे दिल से यही पैमान रहा, तायरे-फ़िक्र तेरे औज से हैरान रहा क़द्र करना तेरी सीखें यही अरमान रहा यही मसला, यही मज़हब यही ईमान रहा आबरू क्या है तमन्ना-ए-वफ़ा में मरना दीन क्या है किसी कामिल की परस्तिश करना मुझ से याराने अदम ने ये अगर फ़रमाया हसरत आबाद जहाँ से तुझे क्या हाथ आया मैं कहूँगा कि बस एक रहबरे कामिल…

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हुब्ब-ए-क़ौमी-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

हुब्ब-ए-क़ौमी-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast हुब्ब-ए-क़ौमी का ज़बाँ पर इन दिनों अफ़्साना है बादा-ए-उल्फ़त से पुर दिल का मिरे पैमाना है जिस जगह देखो मोहब्बत का वहाँ अफ़्साना है इश्क़ में अपने वतन के हर बशर दीवाना है जब कि ये आग़ाज़ है अंजाम का क्या पूछना बादा-ए-उल्फ़त का ये तो पहला ही पैमाना है है जो रौशन बज़्म में क़ौमी तरक़्क़ी का चराग़ दिल फ़िदा हर इक का उस पर…

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वतन का राग-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

वतन का राग-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast ज़मीन हिन्द की रुत्बा में अर्श-ए-आ'ला है ये होम-रूल की उम्मीद का उजाला है मिसिज़-बेसेंट ने इस आरज़ू को पाला है फ़क़ीर क़ौम के हैं और ये राग माला है तलब फ़ुज़ूल है काँटे की फूल के बदले न लें बहिश्त भी हम होम-रूल के बदले वतन-परस्त शहीदों की ख़ाक लाएँगे हम अपनी आँख का सुर्मा उसे बनाएँगे ग़रीब माँ के लिए दर्द-दुख उठाएँगे…

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रामायण का एक सीन-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

रामायण का एक सीन-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast रुख़्सत हुआ वो बाप से ले कर ख़ुदा का नाम राह-ए-वफ़ा की मंज़िल-ए-अव्वल हुई तमाम मंज़ूर था जो माँ की ज़ियारत का इंतिज़ाम दामन से अश्क पोंछ के दिल से किया कलाम इज़हार-ए-बे-कसी से सितम होगा और भी देखा हमें उदास तो ग़म होगा और भी दिल को सँभालता हुआ आख़िर वो नौनिहाल ख़ामोश माँ के पास गया सूरत-ए-ख़याल देखा तो एक दर…

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मर्सिया बाल-गंगा-धर-तिलक-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

मर्सिया बाल-गंगा-धर-तिलक-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast मौत ने रात के पर्दे में किया कैसा वार रौशनी-ए-सुब्ह वतन की है कि मातम का ग़ुबार मा'रका सर्द है सोया है वतन का सरदार तनतना शेर का बाक़ी नहीं सूना है कछार बेकसी छाती है तक़दीर फिरी जाती है क़ौम के हाथ से तलवार गिरी जाती है उठ गया दौलत-ए-नामूस-ए-वतन का वारिस क़ौम मरहूम के एज़ाज़-ए-कुहन का वारिस जाँ-निसार-ए-अज़ली शेर-ए-दकन का वारिस पेशवाओं के…

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मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast

मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले-नज़्में -बृज नारायण चकबस्त-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Brij Narayan Chakbast लरज़ रहा था वतन जिस ख़याल के डर से वह आज ख़ून रुलाता है दीदा-ए-तर से सदा ये आती है फल फूल और पत्थर से ज़मीं पे ताज गिरा क़ौम-ए-हिन्द के सर से हबीब क़ौम का दुनिया से यूँ रवाना हुआ ज़मीं उलट गई क्या मुंक़लिब ज़माना हुआ बढ़ी हुई थी नहूसत ज़वाल-ए-पैहम की तिरे ज़ुहूर से तक़दीर क़ौम की चमकी निगाह-ए-यास थी…

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