भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra सवैये-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra कृष्ण-चरित्र-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra 2 कृष्ण-चरित्र-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra 1 कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra अथ अंकमयी-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra निवेदन-पंचक-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra वह अपनी नाथ दयालुता-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra पद-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu…

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सवैये-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

सवैये-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra  अब प्रीति करी तौ निबाह करौ अब प्रीति करी तौ निबाह करौ अपने जन सों मुख मोरिए ना । तुम तो सब जानत नेह मजा अब प्रीति कहूँ फिर जोरिए ना । 'हरिचंद' कहै कर जोर यही यह आस लगी तेहि तोरिए ना । इन नैनन माहँ बसो नित ही तेहि आँसुन सों अब बोरिए ना ।  यह काल कराल अहै कलि को यह काल कराल अहै कलि को…

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कृष्ण-चरित्र-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra 2

कृष्ण-चरित्र-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra 2   हरि मोरी काहें सुधि बिसराई हरि मोरी काहें सुधि बिसराई । हम तो सब बिधि दीन हीन तुम समरथ गोकुल-राई ।। मों अपराधन लखन लगे जौ तो कछु नहिं बनि आई । हम अपुनी करनी के चूके याहू जनम खुटाई ।। सब बिधि पतित हीन सब दिन के कहँ लौं कहौं सुनाई । 'हरीचंद' तेहि भूलि बिरद निज जानि मिलौ अब धाई ।।  जयति कृष्ण-पद-पद्य-मकरन्द रंजित जयति…

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कृष्ण-चरित्र-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra 1

कृष्ण-चरित्र-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra 1  आजु दोउ बैठे मिलि वृंदावन नव निकुंज आजु दोउ बैठे मिलि वृंदावन नव निकुंज सीतल बयार सेवें मोदीरे मन मैं । उड़त अंचल चल चंचल दुकुल कल स्वेद फूल की सुगंध छायी उपवन में । रस भरे बातें करें हंसि-हंसि अंग भरें बीरी खात जाता सरसात सखियन में । "हरीचन्द' है राधाप्यारी देखि रीझे गिरिधरी आनंद सों उमगे समात नहिं तन में ।।  हरि हम कौन भरोसे जीएँ…

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कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra काल परे कोस चलि चलि थक गए पाय काल परे कोस चलि चलि थक गए पाय, सुख के कसाले परे ताले परे नस के। रोय रोय नैनन में हाले परे जाले परे, मदन के पाले परे प्रान पर-बस के। 'हरिचंद' अंगहू हवाले परे रोगन के, सोगन के भाले परे तन बल खसके। पगन छाले परे लांघिबे को नाले परे, तऊ लाल लाले परे रावरे दरस के। जगत में घर…

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अथ अंकमयी-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

अथ अंकमयी-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra (शब्दों के स्थान पर अंकों का प्रयोग) करि वि४ देख्यौ बहुत जग बिन २स न १। तुम बिन हे विक्टोरिये नित ९०० पथ टेक॥ ह ३ तुम पर सैन लै ८० कहत करि १००ह। पै बिन७ प्रताप-बल सत्रु मरोरै भौंह॥ सो १३ ते लोग सब बिल १७ त सचैन। अ ११ ती जागती पै सब ६न दिन-रैन॥ सखि तुव मुख २६ सि सबै कै १६ त अनंद। निहचै…

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निवेदन-पंचक-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

निवेदन-पंचक-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra श्याम घन अब तौ जीवन देहु। दुसह दुखद दावानल ग्रीषम सों बचाइ जग लेहु। तृनावर्त नित धूर उड़ावत बरसौ कह ना मेहु। ‘हरीचंद’ जिय तपन मिटाओ निज जन पैं करि नेहु॥1॥ श्याम घन निज छबि देहु दिखाय। नवल सरस तन साँवल चपल पीताम्बर चमकाय। मुक्तमाल बगजाल मनोहर दृगन देहु बरसाय। श्रवन सुखद गरजन बंसी धुनि अब तौ देहु सुनाय। ताप पाप सब जग कौ नासौ नेह-मेह बरसाय। ‘हरीचंद’ पिय…

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वह अपनी नाथ दयालुता-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra

वह अपनी नाथ दयालुता-कविता-भारतेंदु हरिश्चंद्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharatendu Harishchandra वह अपनी नाथ दयालुता तुम्हें याद हो कि न याद हो । वह जो कौल भक्तों से था किया तुम्हें याद हो कि न याद हो । व जो गीध था गनिका व थी व जो व्याध था व मलाह था इन्हें तुमने ऊंचों की गति दिया तुम्हें याद हो कि न याद हो । जिन बानरों में न रूप था न तो गुन हि था…

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