भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji जाकै एक फन पै धरन है सो धरनीधर-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji चीकने कलस पर जैसे ना टिकत बून्द-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji…

Continue Readingभाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji राग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै त्यागह त्यागी जानै, दीन दया दान है । जोग जुगत जोगी जानै, भोगरस भोगी जानै रोग दोख रोगी जानै प्रगट बखान है । फूल राख माली जानै, पानह तम्बोली जानै सकल सुगंधिगति गांधी जानउ जान है । रतनै जउहारी जानै, बेहारै ब्युहारी जानै आतम प्रीख्या कोऊ बिबेकी पहचान है ॥६७५॥

Continue Readingराग जात रागी जानै, बैरागै बैरागी जानै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जाकै एक फन पै धरन है सो धरनीधर-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जाकै एक फन पै धरन है सो धरनीधर-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji जाकै एक फन पै धरन है सो धरनीधर तांह गिरधर कहै कउन बड्यायी है । जाको एक बावरो कहावत है बिस्वनाथ ताह ब्रिजनाथ कहे कौन अधिकायी है । सगल अकार ओंकार के बिथारे जिन ताह नन्द नन्द कहै कउन ठकुरायी है । उसतति जानि, निन्दा करत अगयान अंध ऐसे ही अराधन ते मोन सुखदायी है ॥६७१॥

Continue Readingजाकै एक फन पै धरन है सो धरनीधर-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चीकने कलस पर जैसे ना टिकत बून्द-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

चीकने कलस पर जैसे ना टिकत बून्द-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji चीकने कलस पर जैसे ना टिकत बून्द कालर मैं परे नाज निपजै न खेत जी । जैसे धरि पर तरु सेबल अफल अरु बिख्या बिरख फले जगु दुख देत जी । चन्दन सुबास बांस बास बास बासीऐ ना पवन गवन मल मूतता समेत जी । गुर उपदेस परवेस न मो रिदै भिदे जैसे मानो स्वांतिबून्द अह मुख लेत…

Continue Readingचीकने कलस पर जैसे ना टिकत बून्द-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji जैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै निरमल करत है बसन मलीन कउ । जैसे त सुनार बारम्बार गार गार ढार । करत असुध सुध कंचन कुलीन कउ । जैसे तउ पवन झकझोरत बिरख मिल मलय गंध करत है चन्दन प्रबीन कउ । तैसे गुर सिखन दिखायकै ब्रिथा बिबेक माया मल काटिकरै निज पद चीन कउ ॥६१४॥

Continue Readingजैसे धोभी साबन लगाय पीटै पाथर सै-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

केहरि अहार मास, सुरही अहार घास-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

केहरि अहार मास, सुरही अहार घास-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji केहरि अहार मास, सुरही अहार घास मधुप कमल बास लेत सुख मान ही । मीनह निवास नीर, बालक अधार खीर सरपह सखा समीर जीवन कै जान ही । चन्दह चाहै चकोर घनहर घटा मोर चात्रिक बून्दनस्वांत धरत ध्यान ही । पंडित बेद बीचारि, लोकन मै लोकाचार । माया मोहो मै संसार, गयान गुर गयान ही ॥५९९॥

Continue Readingकेहरि अहार मास, सुरही अहार घास-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji जैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत । पाईऐ तौ स्वाद रस रसना कै चाखीऐ । जैसे पीत बरन ही हेम अर पीतर ह्वै जानीऐ महत पारखद अग्र राखीऐ । जैसे कऊआ कोकिला है दोनो खग सयाम तन बूझीऐ असुभ सुभ सबद सु भाखीऐ । तैसे ही असाध साध चेहन कै समान होत । करनी करतूत लग…

Continue Readingजैसे चूनो खांड स्वेत एकसे दिखायी देत ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे तौ समुन्द बिखै बोहथै बहाय दीजै ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

जैसे तौ समुन्द बिखै बोहथै बहाय दीजै ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji जैसे तौ समुन्द बिखै बोहथै बहाय दीजै । कीजै न भरोसो जौ लौ पहुचै न पार कौ । जैसे तौ क्रिसान खेत हेतु करि जोतै बोवै । मानत कुसल आन पैठे ग्रेह द्वार कौ । जैसे पिर संगम कै होत गर हार नारि । करत है प्रीत पेखि सुत के लिलार कौ । तैसे उसतति निन्दा करीऐ…

Continue Readingजैसे तौ समुन्द बिखै बोहथै बहाय दीजै ।-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji