एक दरख़्वास्त-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

एक दरख़्वास्त-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, ज़िंदगी के जितने दरवाज़े हैं मुझ पे बंद हैं देखना हद्द-ए-नज़र से आगे बढ़ कर देखना भी जुर्म है सोचना अपने अक़ीदों और यक़ीनों से निकल कर सोचना भी जुर्म है आसमाँ-दर-आसमाँ असरार की परतें हटा कर झाँकना भी जुर्म है क्यूँ भी कहना जुर्म है कैसे भी कहना जुर्म है साँस लेने की तो आज़ादी मयस्सर है मगर ज़िंदा रहने के लिए…

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इंफ़िसाल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

इंफ़िसाल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, दोस्तो तुम तो कंधों से ऊपर नज़र ही नहीं आ रहे हो चलो अपने चेहरे निदामत की अलमारियों से निकालो इन्हें झाड़ कर गर्दनों पर रखो तुम अधूरे नहीं हो तो पूरे दिखाई तो दो

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अज़ली मसर्रतों की अज़ली मंज़िल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

अज़ली मसर्रतों की अज़ली मंज़िल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, मटियाले मटियाले बादल घूम रहे हैं मैदानों के फैलाव पर दरिया की दीवानी मौजें हुमक हुमक कर हंस देती हैं इक नाव पर सामने ऊदे से पर्बत की अब्र-आलूदा चोटी पर है एक शिवाला जिस के अक्स की ताबानी से फैल रहा है चारों जानिब एक उजाला झिलमिल करती एक मशअल से मेहराबों के गहरे साए रक़्सीदा हैं हर सू…

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अक़ीदे -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

अक़ीदे -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, अपने माज़ी के घने जंगल से कौन निकलेगा! कहाँ निकलेगा बे-कराँ रात सितारे नाबूद चाँद उभरा है? कहाँ उभरा है? इक फ़साना है तजल्ली की नुमूद कितने गुंजान हैं अश्जार-ए-बुलंद कितना मौहूम है आदम का वजूद मुज़्महिल चाल क़दम बोझल से अपने माज़ी के घने जंगल से मुझ को सूझी है नई राह-ए-फ़रार आहन ओ संग ओ शरर बरसाएँ आओ अश्जार की बुनियादों…

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दुआ-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

दुआ-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, मुझे तू मुज़्दा-ए-कैफ़िय्यत-ए-दवामी दे मिरे ख़ुदा मुझे एज़ाज़-ए-ना-तमामी दे मैं तेरे चश्मा-ए-रहमत से काम काम रहूँ कभी कभी मुझे एहसास-ए-तिश्ना-कामी दे मुझे किसी भी मुअज़्ज़ज़ का हम-रिकाब न कर मैं ख़ुद कमाऊँ जिसे बस वो नेक-नामी दे वो लोग जो कई सदियों से हैं नशेब-नशीं बुलंद हूँ तो मुझे भी बुलंद-बामी दे तिरी ज़मीन ये तेरे चमन रहें आबाद जो दश्त-ए-दिल है उसे भी…

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सफ़र और हम-सफ़र-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

सफ़र और हम-सफ़र-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, जंगल जंगल आग लगी है बस्ती बस्ती वीराँ है खेती खेती राख उड़ती है दुनिया है कि बयाबाँ है सन्नाटे की हैबत ने साँसों में पुकारें भर दी हैं ज़ेहनों में मबहूत ख़यालों ने तलवारें भर दी हैं क़दम क़दम पर झुलसे झुलसे ख़्वाब पड़े हैं राहों में सुब्ह को जैसे काले काले दिए इबादत-गाहों में एक इक संग-ए-मील में कितनी आँखें…

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क्या भला मुझ को परखने का नतीजा निकला-ग़ज़लें -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

क्या भला मुझ को परखने का नतीजा निकला-ग़ज़लें -अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, क्या भला मुझ को परखने का नतीजा निकला ज़ख़्म-ए-दिल आप की नज़रों से भी गहरा निकला तोड़ कर देख लिया आईना-ए-दिल तूने तेरी सूरत के सिवा और बता क्या निकला जब कभी तुझको पुकारा मेरी तनहाई ने बू उड़ी धूप से, तसवीर से साया निकला तिश्नगी जम गई पत्थर की तरह होंठों पर डूब कर भी…

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नया साल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi,

नया साल-अहमद नदीम क़ासमी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ahmad Nadeem Qasmi, रात की उड़ती हुई राख से बोझल है नसीम यूँ असा टेक के चलती है कि रहम आता है साँस लेती है दरख़्तों का सहारा ले कर और जब उस के लिबादे से लिपट कर कोई पत्ता गिरता है तो पत्थर सा लुढ़क जाता है शाख़ें हाथों में लिए कितनी अधूरी कलियाँ माँगती हैं फ़क़त इक नर्म सी जुम्बिश की दुआ ऐसा चुप-चाप…

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