चाँद है ज़ेरे-क़दम. सूरज खिलौना हो गया- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

चाँद है ज़ेरे-क़दम. सूरज खिलौना हो गया- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, चाँद है ज़ेरे-क़दम. सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया शहर के दंगों में जब भी मुफलिसों के घर जले कोठियों की लॉन का मंज़र सलोना हो गया ढो रहा है आदमी काँधे पे ख़ुद अपनी सलीब जिंदगी का फ़लसफ़ा जब बोझ ढोना हो गया जिंद यूँ तो आदम…

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कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीक़ो-रक़ीब के- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीक़ो-रक़ीब के- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीक़ो-रक़ीब के । शोलों में अब ढलेंगे ये आँसू ग़रीब के । इक हम हैं भुखमरी के जहन्नुम में जल रहे, इक आप हैं दुहरा रहे क़िस्से नसीब के । उतरी है जबसे गाँव में फ़ाक़ाकशी की शाम, बेमानी होके रह गए रिश्ते क़रीब के । इक हाथ में क़लम है और…

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बज़ाहिर प्यार को दुनिया में जो नाकाम होता है- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

बज़ाहिर प्यार को दुनिया में जो नाकाम होता है- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, बज़ाहिर प्यार को दुनिया में जो नाकाम होता है। कोई रूसॊ कोई हिटलर, कोई ख़ैयाम होता है । ज़हर देते हैं उसको हम कि ले जाते हैं सूली पर, यही इस दौर के मंसूर का अंजाम होता है। जुनूने-शौक़ में बेशक लिपटने को लिपट जाएँ, हवाओं में कहीं महबूब का पैग़ाम होता है…

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न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से कि अब मर्क़ज़ में रोटी है, मुहब्बत हाशिए पर है उतर आई ग़ज़ल इस दौर में कोठी के ज़ीने से अदब का आईना उन तंग गलियों से गुज़रता है जहाँ बचपन सिसकता है…

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काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल…

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जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में परधान बन के आ गए अगली कतार में दीवार फाँदने में यूँ जिनका रिकॉर्ड था वे चौधरी बने हैं उमर के उतार में। जब दस मिनट की पूजा में घंटों गुजार दें समझो कोइ गरीब फंसा है शिकार में

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भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम

भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम । सन् सतासी नज़्र कर दें मज़हबी दंगों के नाम । दोस्त ! मलियाना में जाके देखिए, दो क़दम 'हिटलर' से आगे है ये जम्हूरी निज़ाम । है इधर फ़ाक़ाकशी से रात का कटना मुहाल, रक्स करती है उधर स्कॉच की बोतल में शाम । बम उगाएँगे 'अदम' देहकान गंदुम के एवज़,…

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एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल- धरती की सतह पर -अदम गोंडवी- Adam Gondvi-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita, एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल मशरिकी फन में नई तामीर है मेरी ग़ज़ल सालहा जो हीर व राँझा की नज़रों में पले उस सुनहरे ख़्वाब की तामीर है मेरी ग़ज़ल इसकी अस्मत वक्‍त के हाथों न नंगी हो सकी यूँ समझिए द्रौपदी की चीर है मेरी ग़ज़ल दिल लिए शीशे का देखो संग…

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