शेर और समुद्र- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

शेर और समुद्र- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   दूध चूल्हे पर आग तेज़ होती जाती चोर को देंगे फाँसी या बच निकलेगा समय यह बेमौसम कहाँ जाओगे? यहीं बैठ जाओ मेरे निकट! आधी रात जब खिड़की बन्द थी द्वार भी बन्द काले कागों ने पर्वत शिखरों के ऊपर भरी उड़ान बहुत लम्बी सड़क पदचिह्नों से उगलता विष हमारी भी माँ हमारा भी पिता तुमने भी पत्तों में से लौ…

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मसख़रा- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

मसख़रा- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   इस दुनिया में जहाँ हर कोई लल्ला, हुब्बाख़ातून यज़ीद, यहूदा बहती रेत पर नाचने में मग्न पीड़ित होते हुए भी मसख़रा लगे जहाँ हर चीज़ की एक आँख मुस्कराती हुई आँसू बहाती हुई जहाँ अफ़लातून अनाड़ियों का दरवेश लगे जहाँ ज़रतुश्त का आतिश-क़दा पानी उगले; उसी दुनिया में नफ़रत का तेज़ाब चूसना हीरक की क़ै करना सिमरन को सँभाले रखना, तस्बीह को जला…

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दुआ- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

दुआ- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   सुनते ही मैंने कहा, शायद शहद की मक्खी भिनभिना रही है। बे-यक़ीन दिल ने कहा, नहीं दूर कोई कच्चे सुरों में बीन बजा रहा है। खिड़की खुली थी...थोड़ी-सी। बहुत ही तंग आँगन, ठिठुरी हुई ज़मीन कि जिसमें धूप से कभी भी मेरी मुलाक़ात नहीं हुई उसी आँगन में मिट्टी की बनी कच्ची निराश दीवार के पार देखा मैंने रौशनी की उस मासूम किरण…

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संकेत- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

संकेत- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   सितारे आकाश में मोतियों की माला बना रहे हैं या तुम अपनी लालसाओं की लड़ी बनाती बाहर निकली हो? चाँद ने पहाड़ पर काले बादलों को मात दे दी है- लगता है जैसे पुराना कोई दोस्त तुम्हारा मेरे पास आ रहा हो! सुबह के वक़्त बुलबुलों ने गाना शुरू कर दिया लगा जैसे तुम मेरे लिए मीठी प्रभाती गा रही हो। हवा के…

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बूढ़ी औरत का एकालाप- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

बूढ़ी औरत का एकालाप- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   कितना छोटा है इनसान का जीवन पूर्णिमा की तरह सम्मोहक इस संसार में! कुछ पल ओस के कुछ गुलाब के इससे पहले कि हम अनिश्चित रास्ता पकड़ें क़ब्र का, और चिता किसी की दोस्त नहीं होती। जवानी आती है बचपन के बाद फिर उड़नछू हो जाती है, और कितनी जल्दी चिड़चिड़ेपन की उम्र आ जाती है। कितना संक्षिप्त है हमारा…

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स्वर्णद्वीप- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

स्वर्णद्वीप- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   सूरज आज जल्दी डूबा। सुनहरी आभा चीड़वन की बुझती आग की तरह बुझ गयी। शाम की परछाइयों के लम्बे, काले बाल फैल गये। पहाड़ के पीछे से चाँद निकल आया और तारों की नशीली आँखें चमकने लगीं। सुहानी हवा ने कुछ विचित्र होते देखा तो झील के कानों में फुसफुसा कर उसने राज़ की बात कह दी। वहाँ एक लहर उठी, और यहाँ…

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पुल के पाये पर- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

पुल के पाये पर- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   सुबह के समय सुंबुल पुरवैया में झूमता हुआ शाम के समय बादल गोद में आग सम्हारता हुआ घाव-लाल और ताज़ा दाग़-मिटता हुआ एक दरिया बहता हुआ भागता हुआ बचपन की तितली खो गयी द्वीपो में जलपरियों से पूछा बोलीं : चोटियों पर की बर्फ पिघला करती है एक दरिया बहता हुआ भागता हुआ तलवे जलाते रहे सहरा-सहरा अरे हैरान हिरणियों…

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अधकही बात- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

अधकही बात- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi   बस के अड्डे पर बने बेजान बेहरकत बाम पर जाने कब उतरी थी वह मैंने जब देखा उसे उस बाम पर वह खुरचती जा रही थी फ़र्श के सीमेंट को अपनी सुन्दर चोंच से। दौड़ती चिंघाड़ती सड़कें थीं चारों तरफ़ और आवाज़ों की निरन्तर उमड़ जिसमें हर आवाज़ गुम थी बात को काट रही थी बात था धुआँ हर तरफ़ घेरे हुए…

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