पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 33

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 33 हमारो प्रणाम बांकेबिहारी को हमारो प्रणाम बांकेबिहारी को। मोर मुकुट माथे तिलक बिराजे, कुंडल अलका कारी को॥ अधर मधुर पर बंसी बजावै रीझ रिझावै राधा प्यारी को। यह छवि देख मगन भई मीरा, मोहन गिरधारी को॥ हृदय तुमकी करवायो हृदय तुमकी करवायो। हूं आलबेली बेल रही कान्हा॥१॥ मोर मुकुट पीतांबर शोभे। मुरली क्यौं बजावे कान्हा॥२॥ ब्रिंदाबनमों कुंजगलनमों। गड उनकी चरन धुलाई॥३॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। घर…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 34

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 34 होली पिया बिन लागाँ री खारी होली पिया बिन लागाँ री खारी।।टेक।। सूनो गाँव देस सब सूनो, सूनी सेज अटारी। सूनी बिरहन पिब बिन डोलें, तज गया पीव पियारी। बिरहा दुख भारी। देस बिदेसा णा जावाँ म्हारो अणेसा भारी। गणताँ गणतां घिस गयाँ रेखाँ आँगरियाँ री सारी। आयाँ णा री मुरारी। बाजोयं जांझ मृदंग मुरलिया बाज्यां कर इकतारी। आयां बसंत पिया घर णारी, म्हारी पीड़ा भारी।…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 35

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 35 होली पिया बिण म्हाणे णा भावाँ होली पिया बिण म्हाणे णा भावाँ घर आँगणां णा सुहावाँ।।टेक।। दीपाँ चोक पुरावाँ हेली, पिया परदेस सजावाँ। सूनी सेजाँ व्याल बुझायाँ जागा रेण बितावाँ। नींद णेणा णा आवाँ। कब री ठाढ़ी म्हा मग जोवाँ निसदिन बिरह जगावाँ। क्यासूं मणरी बिथा बतावाँ, हिवड़ो रहा अकुलावाँ। पिया कब दरस दखावां। दीखा णां कोई परम सनेही, म्हारो संदेसाँ लावाँ। वा बिरियां कब कोसी…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 36

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 36 होरी खेलनकू आई राधा प्यारी होरी खेलनकू आई राधा प्यारी हाथ लिये पिचकरी॥टेक॥ कितना बरसे कुंवर कन्हैया कितना बरस राधे प्यारी॥१॥ सात बरसके कुंवर कन्हैया बारा बरसकी राधे प्यारी॥२॥ अंगली पकड मेरो पोचो पकड्यो बैयां पकड झक झारी॥॥३॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर तुम जीते हम हारी॥४॥ हो कांनां किन गूँथी जुल्फां कारियां हो कांनां किन गूँथी जुल्फां कारियां।।टेक।। सुधर कला प्रवीन हाथन सूँ, जसुमति जू…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 29

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 29 सखि म्हाँरो सामरियाणे, देखवाँ कराँरी सखि म्हाँरो सामरियाणे, देखवाँ कराँरी ।।टेक।। साँवरो उमरण, साँवरो सुमरण, साँवरो ध्याण धराँ री। ज्याँ ज्याँ चरण धरणाँ धरती धर, त्याँ त्याँ निरत कराँरी। मीराँ रे प्रभु गिरधर नागर कुंजा गैल फिराँरी।।  सखी आपनो दाम खोटो सखी आपनो दाम खोटो दोस काहां कुबज्याकू॥टेक॥ कुबजा दासी कंस रायकी। दराय कोठोडो॥१॥ आपन जाय दुबारका छाय। कागद हूं कोठोडो॥२॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। कुबजा…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 32

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 32 स्याम विणा सखि रह्या ण जावां स्याम विणा सखि रह्या ण जावां।।टेक।। तण मण जीवण प्रीतम वार्या, थारे रूप लुभावां। खाण वाण म्हारो फीकां सो लागं नैणा रहां मुरझावां। निस दिन जोवां बाट मुरारी, कबरो दरसण पावां। बार बार थारी अरजां करसूं रैण गवां दिन जावां। मीरा रे हरि थे मिलियाँ बिण तरस तरस जीया जावां।। स्याम मिलण रे काज सखी स्याम मिलण रे काज सखी,…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 31

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 31 स्याम सुन्दर पर वाराँ जीवड़ा स्याम सुन्दर पर वाराँ जीवड़ा डाराँ स्याम।।टेक।। थारे कारण जग जण त्यागाँ लोक लाज कुल डाराँ। थे देख्याँ बिण कल णा पड़तां, णेणाँ चलताँ धाराँ। क्यासूँ कहवाँ कोण बूझावाँ, कठण बिरहरी धाराँ। मीराँ रे प्रभु दरशण दीस्यो थे चरणाँ आधाराँ।। स्याम मिलण रो घणो उभावो स्याम मिलण रो घणो उभावो, नित उठ जोऊ बाटड़ियाँ।।टेक।। दरस बिना मोहि कुछ न सुहावै, जक…

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पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 30

पदावली-मीरा बाई -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Meera Bai part 30 स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान स्वामी सब संसार के हो सांचे श्रीभगवान।। स्थावर जंगम पावक पाणी धरती बीज समान। सबमें महिमा थांरी देखी कुदरत के कुरबान।। बिप्र सुदामा को दालद खोयो बाले की पहचान। दो मुट्ठी तंदुलकी चाबी दीन्हयों द्रव्य महान। भारत में अर्जुन के आगे आप भया रथवान। अर्जुन कुलका लोग निहारयां छुट गया तीर कमान। ना कोई मारे ना कोइ मरतो, तेरो…

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