“30 जनवरी-एक आदेश”-प्राण गीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

“30 जनवरी-एक आदेश”-प्राण गीत-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

है तीस जनवरी आज, न स्याही मांग कलम,
क्या लिखना है तो आंसू कागज़ पर उतार
गाने का है गर चाव तोड़ दे यह वीणा
बन्दूक उठा, गोली निकाल कर भर मल्हार ।

ओ चित्रकार ! तस्वीर देवता की न खींच
जो मनुज मर गया है उसको दे रूप-रंग
यमुना तट पर सो रहा मसीहा जो अपना
उसको जीवित कर, भर उसमें यौवन उमंग ।

ओ शिल्पी ! मूर्ति न गढ़ युद्धों की, देख उधर
गोली खाकर ले रहा प्रेम आखिरी श्वास
लोहे के कपड़े पहने शान्ति बिलखती है
ढोते-ढोते बारूद थक गया है विकास ।

इतिहासकार ! यह पृष्ठ अंधेरे का न जोड़
आने वाली सदियाँ काली हो जाएंगी
ओ कवि ! इस नफ़रत को मत दे अपनी ज़ुबान
लाशें जो कुछ जी रहीं, न वे जी पायेंगी ।

वैज्ञानिक ! ऐटम बम फेंक, मत और बना-
है नागासाकी अब तक मुरदों का बज़ार
टैंकों के नीचे अब तक पड़ी तड़पती है
वह देख, कोरिया बीच एशिया की बहार ।

मत शंख बजा ओ मठ, मस्जिद आज़ान न दे !
कर रहा शहीदों का शहीद मरणाभिषेक
आहिस्ता बोल अरे, ओ मज़हब की किताब !
हो गया आज खामोश विश्व-भर का विवेक ।

सब उठो चलो उस राजघाट पर आज जहाँ
बुन रही कफ़न कल्पना, चिता रच रहे छन्द
हैं मूक जहां सौ-सौ कवियों के महाकाव्य
आनन्द स्वयं ही जहां हो रहा निरानन्द ।

पर ठहरो अपने रक्त-सने इन हाथों से
उनकी समाधि मत छुओ, न दो पूजापाधी
सिंहासन’ छोड़ो अगर वन्दना करनी है
पथ पर जाओ मर रहे जहां लाखों गांधी ।

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