ग़ज़ल-जा रहे हैं आप गर तो मुस्कुरा कर जाइये-भारत अंगारा मानु-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharat Angara Manu 

ग़ज़ल-जा रहे हैं आप गर तो मुस्कुरा कर जाइये-भारत अंगारा मानु-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bharat Angara Manu

जा रहे हैं आप गर तो मुस्कुरा कर जाइये,
आपका हर ग़म हमारे पास छोड़ जाइये..।

मुस्कुरा कर जिस तरह मुझसे मिले कल रात तुम,
खुश रहोगे यूँ ही..इतना वादा करते जाइये..।

कितनी हसरत से सदा देखा है तुमको ही सनम,
हो सके तो फिर कभी यूँ ही नज़र आ जाइये..।

दूर दरियाओं में जो बरसों भटकता ही रहा,
अब तो राह-ए-आब में कोई किनारा चाहिए..।

याद-ए-माज़ी, ख़ुशनुमा लम्हात कुछ तो पास हैं,
ज़िन्दगी को तो सिर्फ कोई सहारा चाहिए..।

मुन्तज़िर के घर में अब रोशन चिराग़-ए-याद है,
‘मानु’ अब मेरे अंधेरों से न यूँ घबराइये ।।

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