ग़ज़लें व कविता-यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Poetry Part 3

ग़ज़लें व  कविता-यशु जान  -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan  Poetry Part 3

इरादे नेक नहीं थे

देख आज ग़म खड़े हैं मुझको चारों ओर से घेरे,
इरादे नेक नहीं थे किसी एक के या तेरे या मेरे

मेरे घर आँगन में मौत नाच रही है छम-छम,
मैं काट रहा हूँ रोज़-रोज़ अब ये ग़म के सवेरे

मेरी आँखें भी थक चुकीं तेरा देख-देख रस्ता,
ले रही है ज़िंदग़ी मेरी जल्द मौत के संग फेरे

कब कहाँ क्या हो जाये कोई बता ना सकता,
और क्या पता ये जहान छोड़ कहाँ होंगे बसेरे

इतना कहूंगा यशु जान को है भूलना मुश्किल,
देख भूल कर मौत तेरे भी घर लगा लेगी डेरे

कुदरत

मैंने कुदरत के नज़ारे ख़ूब देखे,
जगते जुगनू और सितारे ख़ूब देखे

मिला सागर ना चाहे निहारने को,
हमने नदियों के किनारे ख़ूब देखे

पास होते भी ख़ुदा को न देख सके,
पर मैंने बच्चे प्यारे-प्यारे ख़ूब देखे

चाहे उनकी जुदाई में जलना पड़ा,
रखे हाथ पे मग़र अंगारे ख़ूब देखे

तेरी महफ़िल में बैठा ना यशु अगर,
हमने सजे हुए चौबारे ख़ूब देखे

ज़माना कहां चला गया

ज़माना कहाँ चला गया तू वहीं रहा खड़ा,
तू कैसे ढूंढ ना पाया खजाना रेत में गड़ा

उसको गले लगा लिया जिन्होंने लगाना था,
तू सारी उमर क्यूं रहा उसके पैरों में पड़ा

तूने नाम उनका लेकर ज़हर पी लिया होगा,
उसको रहा मगर नशा किसी और का चढ़ा

ख़ुदा ने उसकी सुन ली उसने मानी ख़ुदा की,
फिर तू क्यूं मग़रूरी में अपनी बात पर अड़ा

वो खुश हैं तो है ठीक यशु तुझे छोड़कर,
तू भी अपनी मुहब्बत पर इतराता था बड़ा

तेरी यादों का समंदर

तेरी यादों का समंदर है मेरे पास,
लेने ही नहीं देता जो मुझे सांस

तेरे गमों का बाज़ जिस्म पर बैठ,
नोच-नोच के खा रहा है मेरा मांस

हद हो गई है अब तेरे ज़ुल्म की,
दिल जल रहा मेरा जैसे जले बांस

तेरे हुस्न की चमक ने जादु सा कर,
मेरे दिल दिमाग को लिया था फांस

यशु जान जीना चाहता था ज़िंदगी,
धोखा क्यों देके तूने मेरी तोड़ी आस

प्यार से रहो

प्यार से रहो क्यूंकि प्यार ही काम आता है,
जो ना करे उसे ज़िंदगी भर ना आराम आता है

चाहे प्यार करने वाला कितना भी हो बुरा,
दर्द होने पर लबों पे उसका ही नाम आता है

प्यार से काट लो हर बुरे वक़्त को तुम,
बाद में वही वक़्त खुशी का लेके पैगाम आता है

प्यार करने पे ही दुःख दर्द की समझ आती है,
प्यार के रस्ते पर ही कोई अच्छा मुकाम आता है

तू कभी नफ़रत का पीर था यशु जान अब बता,
प्यार किस तरह तोड़ नफरतों को शरेआम आता है

बेवकूफ़ी

मौत से मिलकर जीने की सलाह करना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है,
जलती हुई चिता में कूद कर जा मरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है

जो चला गया वो वापिस नहीं आएगा तुम देख लो आज़माकर,
क़तल करके किसी लाश में जां भरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है

आख़री मंज़िल मेरी तुझ तक पहुंचना था लेकिन किसी ने कहा,
कि तेरे धोख़े की राह पर कर हाँ गुज़रना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है

ज़िन्दगी भर जो साथ रहता है जो बिना धोख़ा दिए हम सबको,
ऐसे साए के साथ होने से बेइंतहा डरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है

सुन ले यशु जान उसने तुझे कभी अपना तो नहीं माना है मगर,
प्यार में एक-दुसरे पर ही ग़ुनाह धरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है

यारों की याद

यारों की याद में हर शाम जी लेते हैं,
ना-ना करते भी एक जाम पी लेते हैं

वो बातें ही छेड़ते हैं दर्द देने वाली ऐसे,
कि नशे में हम उनका नाम ही लेते हैं

कभी-कभी हम ख़ुद को भूल जाते हैं,
वक़्त आने पर होश से काम भी लेते हैं

ख़ुदा जाने ये दोस्ती है कितनी गहरी,
ग़लत होते हुये भी हम ज़ुबान सी लेते हैं

यशु की जान उनकी जान में है यूं फसी,
उनकी बदज़ुबानी को शान मान जी लेते हैं

श्री राम का नाम होता है

जहाँ मेरे प्रभु श्री राम का नाम होता है,
वहां अनर्थ का कोई ना काम होता है

और जहाँ राम आ गए वहां है माँ सीता,
वहीं पे लक्ष्मण संग जति हनुमान होता है

दूरियां मिट जाती सुखों की होती है वर्षा,
हर मुश्किल से टकराना आसान होता है

कुदरत मेहरबान जब साथ खड़े हों राम,
साथ उसके चारों वेदों का ज्ञान होता है,

राम की शरण में जाये जो अमृत पान करे,
वो अमर प्राणी फिर यशु जान होता है

हम जिसे अपना बना लेते हैं

हम जिसे अपना बना लेते हैं उसे छोड़के नहीं जाते,
चाहे वो लाख़ बेवफ़ाई करदे दिल तोड़के नहीं जाते

उन्हें अपनी मर्ज़ी करने दो तुम अपना देखो यार,
बेशर्मी आशिकों का गुर है मुँह मोड़के नहीं जाते

इस इश्क़ का बिगड़ेगा कुछ न तेरा बचेगा कुछ ना,
यूँ खेलकर किसी के दिल से निचोड़ के नहीं जाते

तू परवरदिगार से मांगे वो इश्क़ से मांगे हरदम,
टूटे हुए रिश्ते भी गांठों से कभी जोड़के नहीं जाते

अब यशु जान क्या करलोगे तुम यूँ ना करो ख़ता,
बेशर्म हुसन वालों का पल्लू ओढ़के नहीं जाते

 

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