ख़्वाब टूटे न कोई, जाग ना जाए देखो-बूढ़े पहाड़ों पर-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar 

ख़्वाब टूटे न कोई, जाग ना जाए देखो-बूढ़े पहाड़ों पर-गुलज़ार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gulzar

ख़्वाब टूटे न कोई…
देखो आहिस्ता चलो
और भी आहिस्ता ज़रा
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग ना जाए देखो…
देखना सोच सँभलकर ज़रा पाँव रखना
जोर से बज न उठे, पैरों की आवाज़ कहीं
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग ना जाए देखो
जाग जाएगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा..

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