ख़ुश शहज़ादा 6-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala ,

ख़ुश शहज़ादा 6-कर्मजीत सिंह गठवाला -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Karamjit Singh Gathwala ,

#6.
अगले दिन बन्दरगाह ते सारा दिन लंघाया ।
वापस मुड़्या चन्न जद दिस्या चढ़ आया ।
“प्यारे शहज़ादे अलविदा,” कह पर उस खोल्हे ।
“इक रात होर बस्स ठहर जा तूं मेरे कोले ।”
“एथे ठंढ है वध रही फेर बरफ़ वी आउनी ।
पर मिसर दी धुप्प है तन नूं गरमाउनी ।
मग्गरमच्छ चिकड़ विच ने पए लेटां लाउंदे ।
मेरे साथी मन्दिर विच ने आल्हने बणाउंदे ।
अगली बसंत मुड़ फेर मैं तेरे कोल आऊं ।
तेरे लई सोहना लाल ते नीलम लै आऊं ।
लाल दा रंग गुलाब तों वी लाल है होना ।
नीलम नीले सागर ज्युं होना मनमोहना ।”
“वेख चौराहे विच्च खड़ी कुड़ी माचिसां वाली ।
माचिसां उहदियां डिगियां विच गन्दी नाली ।
खाली हत्थ घर जान ते प्युं तों उह डरदी ।
नंगा सिर, नंगे पैर ने उत्तों आ रही सरदी ।
नीलम उस नूं दे आ उह मारों बच जावे ।
वाधू पैसे नाल लोड़ींदियां चीज़ां लै आवे ।”
“रुक जावांगा तेरे कोल पर अक्ख किदां कढ्ढां ।
आपनी चुंझ नाल मैं तैनूं अन्न्हां कर छड्डां !”
शहज़ादे दे हुकम अग्गे उस सिर निवाया ।
नीलम उहने कुड़ी दी जा तली टिकाया ।
कुड़ी ख़ुश हो भज्ज गई उह वापस आया ।
सदा लई उथे रुकन दा उस मन बणाया ।
“तूं हुन अन्न्हा हो ग्या मैं एथे ही रहना ।
तेरा दुख आपां दोहां ने हुन रलके सहना ।”
“तूं हुन एथों चला जा गल्ल मन्न इह मेरी ।”
उहदे पैरां विच उह सौं ग्या लाई ना देरी ।

(उपरोक्त  रचना औसकर वायलड दी अंग्रेजी कहाणी ‘द हैपी प्रिंस’ ते आधारित है)

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