क़ातिलाना शायरी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Qatilana Shayari Part 4

क़ातिलाना शायरी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Qatilana Shayari Part 4

मेरा नाम है आशिक ग़मों वाला,

मेरा नाम है आशिक ग़मों वाला,
मैं इश्क़ की गली में रहता हूँ,
ये इश्क़ किसी को ना ही लगे,
हर वक़्त ख़ुदा से कहता हूँ,
आ तुझे बताऊँ पूरा पता,
मैं कहाँ – कहाँ दुख सहता हूँ

कुछ ख़ास नहीं जिसके पल्ले में,
तू किसी से पूछ मोहल्ले में,
अव्वल दर्जे का शुदाई है,
जिसकी किस्मत में जुदाई है,
जो यार – यार बस कहता है,
किस झोंपड़ी में वो रहता है,
वो कहेगा इश्क़ की गली में है,
मैं पूरा पता बताता हूँ,
आगे जाकर एक मौत आएगी,
उसके दाएं से गुज़र जाना,
वहाँ एक दुकान है दर्दों की,
पर भूल के मत उधर जाना,
वहाँ पास में ही मयख़ाना है,
जहाँ उसका आना – जाना है,
जो महबूब के नशे में धुत होगा,
यशु समझना वही दीवाना है

ख़ुद मेहनत कर और कुछ कर जाने की कोशिश कर

ख़ुद मेहनत कर और कुछ कर जाने की कोशिश कर
मेहनत नहीं होती तुझसे तो मर जाने की कोशिश कर

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हुसन की बिजलियां आकर गई लौट हैं,
आफ़तों से खेलना ये मेरा भी शौक है,
आना है तो शतेआम आ मैदान ए इश्क़ में,
तेरा परदे में रहना आशिकों की मौत है,

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बहुत दिन हो गए उनका दीदार नहीं हुआ,
वो ठीक हों ख़ुदा ऐसी तुझसे है दुआ,
उसके हुसन को देख परियां भी जलती हैं,
कहीं तू भी उसके ऊपर हो बेईमान ना हुआ

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हाथों से लड़ता – लड़ता कोई हथियार ले आए,
मैं किसी के फटे में टांग नहीं अड़ाता
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मुहब्बत जिंदगी से ना रहे,

मुहब्बत जिंदगी से ना रहे,
मौत महसूस ना हो,
ऐसा बन कोई वक़्त तेरे लिए मनहूस ना हो

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हम गुम नहीं हुए इश्क़ की चार दीवारी में,
उसे हम कैद कर लाए हैं अपनी इश्क़ ख़ुमारी में

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किसी चीज़ को पाने के लिए कुछ हद तक कष्टों को ढोना पड़ता है,
जैसे मोमबत्ती को रौशनी देने के लिए अपना अस्तित्व खोना पड़ता है

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दिल में एक रस्ता है रस्ते में एक घर है,
घर में कोई रहता है जो मेरा दिलबर है,
उस घर में वो किसी को घुसने नहीं देता,
मुझे उससे छीन ले न कोई उसको ये डर है
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हर मंदिर, मस्ज़िद में ब्यान देने को तैयार थे,

हर मंदिर, मस्ज़िद में ब्यान देने को तैयार थे,
तेरे बेनाम रिश्ते को नाम देने को तैयार थे,
तूने ही बेवफाई की मुझे छोड़ जो दिया,
हम तेरे लिए जान देने को तैयार थे

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कोई और हुक्म है कहने को देर मत कर,
इंसान को बदलना मेरे बस की बात नहीं

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पता नहीं क्यूं उनकी तरफ़ खींचा चला जाता हूँ,
होश कर नहीं रहती मुझे मैं लौटकर जब आता हूँ,
ये भी एक करिश्मा है यशु जान आने के बाद,
अपने आपको घर नहीं उनकी आग़ोश में पता हूँ

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आसमां की आँखों पे लगा चश्मा सा लग रहा है,
उनके आने से ज़िंदगी जीना आसान सा लग रहा है,
हर ख़्वाहिश पूरी हो रही है उनकी रहनुमाई से,
उनका आना मेरी ज़िन्दगी में करिश्मा सा लग रहा है
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एक सपने ने मेरी नींद उड़ा डाली,

एक सपने ने मेरी नींद उड़ा डाली,
सपने में उनकी दिख गई बेहाली,
मैंने किया फोन हाल पूछने के लिए,
और उधर आई बदले में गाली पे गाली

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आब की एक बूँद को मयख़ाना कर देगी,
मेरी छोटी सी हरकत को आशिकाना कर देगी,
यूँ ना भर – भर के नज़र मुझको देखो,
तेरी एक नज़र ही मुझको दीवाना कर देगी

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दूसरों की नज़रों में वो बड़ा नहीं बन सकता,
अपने से बड़ों की जो इज़्ज़त नहीं कर सकता

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माँ अगर ठंडी छाँव है,
तो पिता खुशियों का गाँव है,
माँ अगर शीतल जल है,
तो पिता उसमें चलने वाली नांव है
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दवाई से बहतर दुआ काम आती है,

दवाई से बहतर दुआ काम आती है,
बेवफ़ाई से ज़्यादा किसी की वफ़ा काम आती है,
छोड़ जाते हैं जब सारे रिश्तेदार हमें,
आख़िर में जन्म देने वाली माँ ही काम आती है

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