क़ातिलाना शायरी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Qatilana Shayari Part 2

क़ातिलाना शायरी -यशु जान -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Yashu Jaan Qatilana Shayari Part 2

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मेरे प्यार की कीमत कोई लगा ना सकता,
बिक ही गया तो समझा जायेगा सट्टा,
यशु कोई तो कीमत होगी तेरे प्यार की,
मैंने कहा मैं जान भी हूँ दे सकता

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 ये तो इश्क़ नहीं है ‘जान’

ये तो इश्क़ नहीं है ‘जान’
कोई बीमारी हो सकती है,
जिसमें भूख नहीं लगती,
जिसमें प्यास नहीं लगती

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हमें जंग में देख मौत घबराती है,
हम बोलते नहीं हमारी तलवार ही बताती है,
सुनो बुज़दि‍लों और ना आता है कुछ तुम्हें,
सिर्फ़ महफ़िलों में जाकर बकवास करनी आती है

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चाहे दिन को समझना चाहे रात को समझना,
मेरी लिखी और कही हर एक बात को समझना,
इंसान के लिए कोई काम मुश्किल हो सकता,
इतना भी छोटा मत अपनी औकात को समझना

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मेरे सोने और उसके प्यार से सुलाने में बहुत फर्क़ है,
किसी को भूलने ख़ुद को भूल जाने में बहुत फर्क़ है,
फर्क़ था यशु उनके दिमाग और मेरे दिल से सोचने में,
अब उनके महल और मेरे झोंपड़ी खाने में बहुत फर्क़ है

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शायर बन गया

तूने मुझे गिराया है मेरी ही नज़रों से,
मुहब्बत धोखा दे गई पहुँचाया कब्रों पे,

पहले तेरा बना ग़ुलाम,
फ़िर कायर बन गया,
शुक्रिया तेरी बेवफाई झूठी मुहब्बत का,
तेरे धोखे की वज़ह से मैं शायर बन गया

करोड़ों दिलों पे राज कर,
हम जाम पी रहे हैं,
तेरी यादों को पाल रहे हैं,
और जी भी रहे हैं,

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मैं मस्त रहता हूँ अपनी ही दुनियां में,
औरों की तरफ़ झाँकना आदत नहीं है मेरी

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क्यूँ मुझपर लग रहे हैं यशु इल्ज़ाम पे इल्ज़ाम,
मुझे छोड़ने का फैसला तो उसने किया था

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इतना मत प्यार कर मुझे जान से भी ज्यादा,
दिक्कत होगी तुझे मुझको भूल पाने में
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जोश – ए – जवानी है,

जोश – ए – जवानी है,
दिमाग़ भरा शतरंज की चालों से,
तूफानों की औकात अब हम बताएंगे

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