हौसला बहोत है–अंतर्यात्रा-परंतप मिश्र-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Parantap Mishra

हौसला बहोत है–अंतर्यात्रा-परंतप मिश्र-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Parantap Mishra

 

मुसाफ़िर हूँ बेशक, सफ़र लम्बा बहोत है
हमसफ़र साथ है तो हमें हौसला बहोत है

देखता नहीं अपनी कोशिशों की हार-जीत
कामयाबियों के रास्तों में इंतिहा बहोत है
यूँ तो चलता रहता हूँ, बिना थके रात-दिन
क़रीब और आओ अभी फ़ासला बहोत है
दुशवारियों से मजबूत होता है जज्बा मेरा
अंजाम के वास्ते तुम्हारा भरोसा बहोत है
नहीं लिखता की मिलें तालियाँ, शोहरतें
हो जाये खामोश नजरे इनायत बहोत है
यादों के गुलिस्तां में, ये फिज़ा की खुसबू
शाख पर जो गुलाब को इंतजार बहोत है
फ़तह करता हूँ मुश्किलों के समंदर को
हो इशारे तो खज़ाने में नजराने बहोत हैं
करता नहीं किसी से गिला अनजाने में भी
उनकी मुस्कराहट, मुझे अजीज़ बहोत है
कहती रहती हो अक्सर न कहकर भी जो,
वो कहकर देखो, मुझे भी कहना बहोत है
हैं जबाबों के सवाल में सवालों के जवाब
ज़िन्दगी जो तुमसे है तो माइने बहोत है

 

Leave a Reply