हौसला।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

हौसला।-राही चल : अनिल मिश्र प्रहरी (Anil Mishra Prahari)| Hindi Poem | Hindi Kavita,

हौसला टूटे न टूटी जो
अगर पतवार है,
कश्तियाँ होतीं उन्हीं की
मौज के उस पार है।

जो अगर हिम्मत ह्रदय में
रोक ले तूफान को,
लड़खड़ाते भी मगर
होती न उनकी हार है।

राह की गर्मी न देती
है तपन, बेचैनियाँ,
मंजिलों की चाह देती
थपकियाँ सौ – बार है।

हो विकट चाहे सफर
या शूल दे धरती- गगन,
हौसला ही जिन्दगी में
जीत का आधार है।

 

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