होली-कविताएँ-गोलेन्द्र पटेल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Golendra Patel

होली-कविताएँ-गोलेन्द्र पटेल-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Golendra Patel

 

फाल्गुनी लोरी की लय में होरी
सुना रही है

आँगन में बन रही है रंगोली
खुब उड़ रही है रोरी
चेहरे पर अबीर ही अबीर है
रूप में रंग ही रंग

एक बोली
होली गाती थी

होली गाना
सिर्फ़
उसी को ही आता था

उसका नाम है ब्रज!

 

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