होमोहाइडेल वर्गेसिस-महावृक्ष के नीचे अज्ञेय-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

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यहाँ जो खोपड़ी मिली थी
मेरी तो नहीं ही थी,
निश्चय ही मेरे किसी पूर्वज की भी नहीं थी।
हम क्या थे, कौन हैं
यह हम पाँच महीने
पाँच बरस, पचीस बरस बाद ही
निश्चयपूर्वक नहीं कह सकते-
पर हम कौन क्या नहीं थे
यह हम पाँच लाख साल बाद भी
ध्रुव जानते हैं।

हाइडेलबर्ग, 3 फ़रवरी, 1976

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