हिल-स्टेशन-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

हिल-स्टेशन-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

घुल रहा है सारा मंज़र शाम धुंधली हो गयी
चांदनी की चादर ओढ़े हर पहाड़ी सो गयी

वादियों में पेड़ हैं अब नीलगूं परछाइयां
उठ रहा है कोहरा जैसे चांदनी का हो धुंआ

चाँद पिघला तो चट्टानें भी मुलायम हो गयीं
रात की साँसें जो महकी और मद्धम हो गयीं

नर्म है जितनी हवा उतनी फिज़ा खामोश है
टहनियों पर ओस पी के हर कली बेहोश है

मोड़ पर करवट लिए अब ऊंघते हैं रास्ते
दूर कोई गा रहा है जाने किसके वास्ते

ये सुकूं में खोयी वादी नूर की जागीर है
दूधिया परदे के पीछे सुरमई तस्वीर है

धुल गयी है रूह लेकिन दिल को ये एहसास है
ये सुकूं बस चाँद लम्हों को ही मेरे पास है

फासलों की गर्द में ये सादगी खो जाएगी
शहर जाके ज़िन्दगी फिर शहर की हो जाएगी

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