हिम्मत का मिरी आप-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

हिम्मत का मिरी आप-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

“हिम्मत का मिरी आप मियां मीर है शाहिद ।
अज़मत का मिरी शाह जहांगीर है शाहिद ।
सर जिस से कटा दिल्ली में शमशीर है शाहिद ।
तो सब से ज़्यादा फ़लक-ए-पीर है शाहिद ।
जब ज़ुल्म से ज़ालिम ने जहां पीस दिया था ।
हम ने ही धर्म के लिए फिर सीस दिया था ।

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