हिमालय ने पुकारा-गोपाल सिंह नेपाली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Singh Nepali

हिमालय ने पुकारा-गोपाल सिंह नेपाली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Singh Nepali

शंकर की पुरी चीन ने सेना को उतारा
चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा

हो जाए पराधीन नहीं गंगा की धारा
गंगा के किनारों को शिवालय ने पुकारा

हम भाई समझते जिसे दुनिया में उलझ के
वह घेर रहा आज हमें बैरी समझ के
चोरी भी करे और करे बात गरज के

बर्फों मे पिघलने को चला लाल सितारा
चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा
(यह रचना अधूरी है)*

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