हाइकु-त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 1

हाइकु-त्रिलोक सिंह ठकुरेला -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita By Trilok Singh Thakurela Part 1

 

हाइकु
1.
कोसते रहे
समूची सभ्यता को
बेचारे भ्रूण ।

2.
दौड़ाती रही
आशाओं की कस्तूरी
जीवन भर ।

3.
नयी भोर ने
फडफढ़ाये पंख
जागीं आशाएं ।

4.
प्रेम देकर
उसने पिला दिए
अमृत घूँट ।

5.
थका किसान
उतर आई साँझ
सहारा देने ।

6.
किसे पुकारें
मायावी जगत में
बौराये लोग ।

7.
बनाता रहा
बहुत सी दीवारें
वैरी समाज ।

8.
दम्भी आंधियां
गिरा गयीं दरख़्त
घास को नहीं ।

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