हाइकु-अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

हाइकु-अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita,

बड़ी राहतें
सावन की आहटें
सब मगन।

झरती बूंदें
चारु शिवाभिषेक
मनभावन

काले बादल
हवाओं की लय पे
शुभ आग़ाज।

किसने बुने
हमारे ताने बाने
हम न जाने।

हर समय
कसौटी ज़िंदगी की
एक परीक्षा।

ये मोहब्बत
न पहले सी सदा
नकली अदा।

सब कीमती
पर मेरा ये दिल
बेशकीमती।

उड़ते पंछी
छूने चले अंबर
गुनगुनाते।

देश प्रेमियों
बहे न यूं बेकार
देश का रक्त।

जान लें सभी
अच्छाई ये हमारी
बने ताक़त।

तुम आज़ाद
न अब हम क़ैद
स्वयं का छंद।

है गुलिस्तान
हमारा ये वतन
हमवतन।

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