हां साकिया किधर है, -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

हां साकिया किधर है, -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

हां साकिया किधर है, शराब-ए-कुहन पिला ।
कहता है तुझ से जोगी शीरीं-सुख़न पिला ।
शे’रों को शे’री पिला, शमपीयन पिला ।
पाउ आध पाउ हेच है दो वार मन पिला ।
सतिगुर की ताकि रन में लड़ाई दिखा सकूं ।
मैं भी रकाब थाम के मैदां में जा सकूं ।

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