हर सदा पैग़ाम-ये रदीफ़ो काफ़िया -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas 

हर सदा पैग़ाम-ये रदीफ़ो काफ़िया -कुमार विश्वास-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Vishwas

हर सदा पैग़ाम देती फिर रही दर-दर
चुप्पियों से भी बड़ा है चुप्पियों का डर

रोज़ मौसम की शरारत झेलता कब तक
मैंने खुद में रच लिए कुछ खुशनुमा मंज़र

वक़्त ने मुझ से कहा “कुछ चाहिए तो कह”
मैं बोला शुक्रिया मुझको मुआफ़ कर

मैं भी उस मुश्कि़ल से गुज़रा हूँ जो तुझ पर है
राह निकलेगी कोई तू सामना तो कर

Leave a Reply