हरि को नामु सदा सुखदाई- शब्द-मारू महला ९ ੴ सतिगुर प्रसादि-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

हरि को नामु सदा सुखदाई- शब्द-मारू महला ९
ੴ सतिगुर प्रसादि-गुरू तेग बहादुर साहिब-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Guru Teg Bahadur Sahib

हरि को नामु सदा सुखदाई ॥
जा कउ सिमरि अजामलु उधरिओ गनिका हू गति पाई ॥1॥रहाउ॥
पंचाली कउ राज सभा महि राम नाम सुधि आई ॥
ता को दूखु हरिओ करुणामै अपनी पैज बढाई ॥1॥
जिह नर जसु किरपा निधि गाइओ ता कउ भइओ सहाई ॥
कहु नानक मै इही भरोसै गही आनि सरनाई ॥2॥1॥1008॥

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