हरदी अउ चूना मिलि अरुन बरन जैसे-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

हरदी अउ चूना मिलि अरुन बरन जैसे-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

 

हरदी अउ चूना मिलि अरुन बरन जैसे
चतुर बरन कै तम्बोल रस रूप है ।
दूध मै जावनु मिलै दधि कै बखानियत
खांड घ्रित चून मिलि बिंजन अनूप है ।
कुसम सुगंध मिलि तिल सै फुलेल होत
सकल सुगंध मिलि अरगजा धूप है ।
दोइ सिख साधसंगु पंच परमेसर है
दस बीस तीस मिले अबिगति ऊप है ॥१२२॥

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