हम साथ चाहते हैं -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

हम साथ चाहते हैं -शहीदान-ए-वफ़ा-अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

हम साथ चाहते हैं अजल के दहन में जाएं ।
मर जाएं भी तो कबर में एक साथ ही कफ़न में जाएं ।
हाथों में हाथ डाल के बाग़-ए-अदन में जाएं ।
मासूमों के लिए जो बना उस चमन में जाएं ।
मज़हब को पातशाह ने बट्टा लगा दिया ।
हम ने अमल से पंथ को अच्छा बना दिया ।

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