हम ज़रूर जीतेंगे- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

हम ज़रूर जीतेंगे- ऐसा कोई घर आपने देखा है अज्ञेय- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya,

जी हम ज़रूर जीतेंगे
अगर हम हार न गये
हम अपने दुश्मनों को मारेंगे
अगर वे ही पहले हमें मार न गये
अनन्त है काल-अनन्त-
पर कहाँ है समय हमारे पास
और मृत्यु है
और हम जी रहे हैं इस समय
इस समय इस समय..
कहाँ कहाँ
नहीं जमा हैं वे बम
जिनसे एक क्षण में
मिट जा सकते हैं हम
खो जा सकते हैं एक काली घुटन में
जो पृथ्वी को घेर लेगी-
मिट जा सकते हैं हम-
किस नये अर्थ में
मानव है निर्माता अपनी नियति का
हाँ, हम जीतेंगे ज़रूर
अगर हम (पहले ही और व्यर्थ में)
हार न गये
हम अपने दुश्मनों को मारेंगे
अगर वे ही पहले हमें मार न गये…

Leave a Reply