हम ख्वाब तोड़ कर आये है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

हम ख्वाब तोड़ कर आये है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

ख्वाइशो के घर हम ख्वाब तोड़ कर आये
ले आये सब मगर खुद को छोड़ कर आये

खुदरंग से बेहतर क्या रंग होता जमाने मे
शहर मे रंग लेने क्यों गांव छोड़ कर आये

गैर मकां देख, एक महल का ख्वाब लिये
कोरी काया पर बहुत बोझ ओढ़ कर आये

धुंधली मंजिलो के पत्थरीले सफर मे हम
कैसे नादां हम जो नंगे पांव दौड़ कर आये

तिनको से जोड़ा आशियां ही जन्नत है जां
बशर्ते उड़े सब परिंदे शाम लौट कर आये ।

 

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