हम किसके क्या क्या होते थे- अंतर्द्वंद्व एखलाक ग़ाज़ीपुरी-एखलाक ग़ाज़ीपुरी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Akhlaque Gazipuri

हम किसके क्या क्या होते थे- अंतर्द्वंद्व एखलाक ग़ाज़ीपुरी-एखलाक ग़ाज़ीपुरी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Akhlaque Gazipuri

खुश होता था अपना मन कागज़ की नाव चला कर के
जब सारा खजाना मिल जाता था गुल्ली डंडा पा कर के
मन भरता था कहाँ भला तब चोर सिपाही खेल के भी
हम पानी संग अठखेली करते पोखर ताल में जा कर के
दादा दादी के हम प्यारे उनकी आँख का नूर थे हम
बचपन कितना प्यारा था जब दायित्वों से दूर थे हम
क्या बतलाएं छुटपन में हम किसके क्या क्या होते थे
अम्मा के थे किसन कन्हैया बाबा के मयूर थे हम
अब फूस का छप्पर पड़ी मड़ईया कच्चा आँगन नहीं रहा
अब थाली में चंदा दिखलाता जल का दर्पण नहीं रहा
अब नहीं रहे वो खेल खिलौने रौनक मस्ती नहीं रही
अब छूट गए सब संगी साथी प्यारा बचपन नहीं रहा

Leave a Reply