हम आदमी हां इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

हम आदमी हां इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा-शब्द -गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

हम आदमी हां इक दमी मुहलति मुहतु न जाणा ॥
नानकु बिनवै तिसै सरेवहु जा के जीअ पराणा ॥१॥
अंधे जीवना वीचारि देखि केते के दिना ॥१॥ रहाउ ॥
सासु मासु सभु जीउ तुमारा तू मै खरा पिआरा ॥
नानकु साइरु एव कहतु है सचे परवदगारा ॥२॥
जे तू किसै न देही मेरे साहिबा किआ को कढै गहणा ॥
नानकु बिनवै सो किछु पाईऐ पुरबि लिखे का लहणा ॥३॥
नामु खसम का चिति न कीआ कपटी कपटु कमाणा ॥
जम दुआरि जा पकड़ि चलाइआ ता चलदा पछुताणा ॥४॥
जब लगु दुनीआ रहीऐ नानक किछु सुणीऐ किछु कहीऐ ॥
भालि रहे हम रहणु न पाइआ जीवतिआ मरि रहीऐ ॥५॥२॥(660)॥

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