हम्द-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

हम्द-कविता -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

मलिकए-शहरे-ज़िन्दगी तेरा
शुक्र किस तौर से अदा कीजे
दौलते-दिल का कुछ शुमार नहीं
तंगदस्ती का क्या गिला कीजे

जो तिरे हुस्न के फ़कीर हुए
उनको तशवीशे रोज़गार कहां
दर्द बेचेंगे गीत गायेंगे
इससे ख़ुशवक़्त कारोबार कहां

जाम छलका तो जम गई महफ़िल
मिन्नते-लुत्फ़े-ग़मगुसार किसे
अश्क टपका तो खिल गया गुलशन
रंजे-कमज़रफ़ीए-बहार किसे

ख़ुशनशीं हैं कि चश्मे-दिल की मुराद
दैर में हैं न ख़ानकाह में हैं
हम कहां किस्मत आज़माने जायें
हर सनम अपनी बारगाह में है

कौन ऐसा ग़नी है जिससे कोई
नकदे-शमसो-कमर की बात करे
जिसको शौके-नबरद हो हमसे
जाए तसख़ीरे-कायनात करे

जून, 1959

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