हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है
मगर वो बात पहले-सी नहीं है

मुझे मायूस भी करती नहीं है
यही आदत तिरी अच्छी नहीं है

बहुत-से फ़ायदे हैं मसलेहत में
मगर दिल की तो ये मर्ज़ी नहीं है

हर इक की दास्ताँ सुनते हैं जैसे
कभी हमने मुहब्बत की नहीं है

है इक दरवाज़ा बिन दीवार दुनिया
मफ़र ग़म से यहाँ कोई नहीं है

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